हजारों किलोमीटर करते हैं सफर
यह प्रवासी पक्षी हस्तिनापुर सेंक्चुअरि के वेटलैंड में पहुंचने के लिए कई हजार किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचते हैं। यहां वह तीन से चार महीना रुकते हैं और इसके बाद पुनः लौट जाते हैं। कई प्रजाति के पक्षी ऐसे हैं जो पांच से दस हजार किलोमीटर की यात्रा कर हिमालय को पार करते हुए यहां पहुंचते हैं। सर्दी के साथ-साथ भीमकुंड वेटलैंड में अब पक्षियों की तादाद बढ़ती जा रही है।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में 16 वेटलैंड मौजूद
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में दो लाख से भी ज्यादा प्रवासी पक्षी हर साल यहां आते हैं। यहां वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ 16 ऐसे वेटलैंड चिह्नित कर चुका है जहां प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इस बार अधिक बारिश होने से वेटलैंड क्षेत्र की झीलों में अधिक पानी भरा होने से भरपूर भोजन है। यहां प्रवासी पक्षियों के झुंड देखे जा रहे हैं जो भोजन के लिए विचरण करते हैं। इससे वन विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं। हस्तिनापुर वेटलैंड क्षेत्र में 300 से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी प्रतिवर्ष पहुंचकर प्रजनन करते हैं और अपने कुनबे को बढ़ाकर मार्च-अप्रैल माह में लौट जाते हैं।
इन दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं यहां
सेंक्चुअरि भीमकुंड वेटलैंड में कॉमन कूट, नार्दर्न पिनटेल, मनकूट, नार्दर्न शॉवलर, कॉमन पॉचार्ड, टफ्टेड पॉचार्ड, रेड क्रेस्टेड पॉचार्ड, कॉमन टील, बार हेडेड गूज, रडी शेल डक, ग्रे लेग गूज, पालास गल, ग्रेटर फ्लेमिंगो, ग्रेट व्हाइट पेलिकन, व्हाइट टेल लेपविंग, येल्लो वाटल्ड लेपविंग, लिटिल ग्रिब, कोटन पिगमि गूज व्हिलिंग टील, पेंटेड स्टॉर्क, ब्लैक स्टॉर्क, वृली नेक्ड स्टॉर्क, सेंडपाइपर्स, स्टिंट, प्लोवरस सहित कई दुर्लभ प्रजातियों के प्रवासी पक्षी देखने को मिलते हैं।