प्रदेश सरकार की ओर से मेरठ मेट्रो ट्रेन की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) केंद्र सरकार को भेजने की कवायद तेज हो गई है। कुछ बिंदुओं को लेकर उठी समस्याओं का समाधान नए सिरे से तैयार किया जा रहा है, ताकि मजबूत डीपीआर पेश की जा सके। कई ऐसे सवालों के जवाब भी तलाशे जा रहे हैं, जिन्हें लेकर जवाब मांगा जा सकता है।
30 जून को मेरठ मेट्रो की डीपीआर को मुख्य सचिव ने हरी झंडी दी थी। इस बारे में स्थानीय स्तर से प्रस्ताव मंजूर कर शासन को भेजा गया था। मुख्य सचिव की हरी झंडी के बाद इसे कैबिनेट को भेजा गया। उम्मीद है कि जुलाई माह में ही कैबिनेट प्रस्ताव को मंजूर कर केंद्र सरकार को भेज देगी। अभी तक यह प्रस्ताव कैबिनेट में पारित नहीं हुआ है। एमडीए अधिकारियों ने लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन(एलएमआरसी) के अधिकारियों को पत्र लिखकर कई बिंदुओं पर अतिरिक्त जानकारी तैयार की है। रिपोर्ट में 14 स्टेशन ऐसे हैं, जहां जगह की किल्लत है। लखनऊ से जानकारी दी गई है कि डीपीआर पर चर्चा के दौरान यह बिंदु उठ सकता है। इस बाबत यहां से जवाब भेजा गया है। पिक एंड ड्राप सिस्टम पर जोर देने की बात कही है। स्थानीय निकायों से मिलने वाले धन को लेकर भी सवाल पूछे जा सकते हैं। चीफ इंजीनियर का कहना है कि इस बाबत एलएमआरसी अधिकारियों से बात की गई है। उम्मीद है कि इसी माह के आखिरी सप्ताह में कैबिनेट से मंजूरी के बाद डीपीआर को केंद्र को भेज दिया जाएगा।
यह है लागत का आंकड़ा
मुख्य सचिव को भेजी जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये खर्च आएगा। जनवरी 2016 के मूल्यों के आधार पर 11 हजार 220 करोड़ रुपये लागत आएगी। मार्च 2022 तक यह लागत बढ़कर करीब 14 हजार 928 करोड़ रुपये हो जाएगी। प्रोजेक्ट के निर्माण में भारत सरकार की ओर से 20 प्रतिशत, राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत दिया जाएगा, लोकल बॉडी द्वारा 2.39 प्रतिशत दिया जाएगा तथा वित्त संस्थाओं से 57.61 प्रतिशत ऋण लिया जाएगा।
65 लाख वर्ग मीटर जगह चाहिए
रेजीडेंशियल, इंस्टीट्यूशनल और कॉमर्शियल एक्टिविटी के लिए डीपीआर में 51.1 लाख वर्ग मीटर जगह प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा पार्किंग डेवलपमेंट के लिए 14 लाख वर्ग मीटर जमीन की आवश्यकता होगी। कुल मिलाकर 65.1 लाख वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता होगी।
मेट्रों के लिए संभावित कार्यक्रम
प्रदेश सरकार का अप्रूव्ल - जुलाई 2016 तक
केंद्र सरकार का प्रारंभिक अप्रूव्ल - अक्टूबर 2016
अंतरिम बैठक - दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए कमेटी का गठन - दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए निविदा - जनवरी 2017
केंद्र सरकार की फाइनल अप्रूव्ल - मार्च 2017
प्राथिमकता के आधार पर सिविल वर्क का चयन - मार्च 2017
काम पूरा - मार्च 2022
यह रहेगी कॉरिडोर की लंबाई
राइट्स के महाप्रबंधक पीयूष कंसल ने बताया कि मेट्रो का प्रथम कॉरिडोर परतापुर से मोदीपुरम तक होगा, जिसकी लंबाई 20 किमी होगी। द्वितीय कॉरिडोर श्रद्धापुरी फेस-2 से जागृति विहार एक्सटेंशन तक होगा। यह कुल 15 किमी लंबा होगा।
उन्होंने बताया कि प्रथम कॉरिडोर में 11.6 किमी एलिवेटेड और 7.2 किमी अंडरग्राउड होगा। द्वितीय कॉरिडोर में 10.7 किमी एलिवेटेड और 3.5 किमी अंडरग्राउड होगा। प्रथम कॉरिडोर में कुल 16 स्टेशन में से 11 एलिवेटेड और 5 अंडरग्राउड होंगे। द्वितीय कॉरिडोर में 13 स्टेशन में से दस एलिवेटेड और तीन अंडरग्राउंड होंगे। उन्होंने बताया कि प्रथम कॉरिडोर में मोदीपुरम में 10 हेक्टेयर का और द्वितीय कॉरिडोर में गोकुलपुर में 12.2 हेक्टेएयर का एक-एक कॉरिडोर होगा।
29 रहेंगे स्टेशन
प्रथम कॉरीडोर के 16 स्टेशन में परतापुर, डीएन पॉलीटेक्निक, रिठानी, शताब्दी नगर, संजय वन, ब्रह्मपुरी, बागपत रोड क्रासिंग, रेलवे रोड चौराहा, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कॉलोनी, सोफीपुर, डोरली, गुरुकुल, पल्लवपुरम और मोदीपुरम शामिल हैं।
द्वितीय कॉरीडोर में कुल 13 स्टेशन में श्रद्धापुरी फेस-2, कंकरखेड़ा, मेरठ कैंट, रजबन बाजार, बेगमपुल, बच्चा पार्क, शाहपीर गेट, हापुड़ अड्डा चौराहा, गांधी आश्रम, मंगल पांडे नगर, तेजगढ़ी, मेडिकल कॉलेज और जागृति विहार एक्सटेंशन है। उन्होंने बताया कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की औसत दूरी प्रथम कॉरीडोर में 1.2 किमी और द्वितीय कॉरिडोर में 1.1 किमी होगी।