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गुड़गांव में बैठकर गूगल अर्थ से ही कर रहे मेट्रो का सर्वे

Sat, 07 Nov 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिकसर्वे) की टीम गुड़गांव में बैठकर मेरठ की मेट्रो ट्रेन केलिए सर्वे कर रही है, वह भी गूगल अर्थ को आधार बनाकर। सैन्य अधिकारियों के साथ शुक्रवार को हुई बैठक में यह खेल सामने आया। सेना के अधिकारियों ने दो टूक कहा कि मेट्रो के प्रोजेक्ट में वह हर मदद तत्काल करने को तैयार हैं पर आधी अधूरी तैयारियाें पर कतई नहीं।
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उन्होंने इंच बाई इंच के हिसाब से सजरे पर सुपर इम्पोज हुआ डिजाइन देने को कहा, जिसे राइट्स की टीम पेश ही नहीं कर पाई। उधर कछुआ गति से हो रहे डीपीआर के काम से नाराज एमडीए अधिकारियों ने राइट्स अधिकारियों को साफ कह दिया है कि इसकी शिकायत मुख्य सचिव से की जाएगी।

मेरठ में मेट्रो की डीपीआर को लेकर राइट्स की टीम के साथ नोडल अधिकारी विवेक भास्कर, एसई शबीह हैदर आदि ने जीओसी मेजर जनरल सुनील यादव, सीईओ कैंट बोर्ड राजीव श्रीवास्तव आदि अधिकारियों के साथ मीटिंग की। दरअसल मेट्रो का एलाइनमेंट कैंट क्षेत्र के पांच स्टेशनों से होकर गुजर रहा है।
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मेट्रो के मेरठ रेलवे स्टेशन कैंट, रजबन बाजार, बेगमपुल पर दो स्टेशन तथा एमईएस कालोनी कैंट ऐसे स्टेशन प्रस्तावित हैं जो छावनी क्षेत्र में हैं। इस बाबत छावनी तथा सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक होनी थी। अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें पूरा प्लान समझाया जाए।

बैठक में खुल गई पोल
शुक्रवार को हुई बैठक में राइट्स की टीम की पोल खुल गई कि वह मेट्रो स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर कितनी लापरवाही से काम कर रही है। यह प्रोजेक्ट न केवल मेरठ के लिए सबसे अहम है बल्कि प्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा तक इससे जुड़ी है।

बैठक में सामने आया कि मेट्रो की छोटी सी टीम लोकल में काम करके सारा डाटा गुड़गांव ले जाती है और वहां गूगल अर्थ से टोपोग्राफी या अन्य सर्वे की रिपोर्ट तैयार की गई है। गूगल अर्थ का नक्शा ही बैठक में पेश किया गया, जिसे अधिकारियाें ने नकार दिया।

कैंट अधिकारियों ने साफ कहा कि इससे काम नही चलेगा। वह नक्शा चाहिए जो राजस्व अभिलेखों केसजरे से तैयार हो और सजरे पर ही सुपर इम्पोज किया गया हो। वहां यह पता चले कि पिलर, सड़क , मार्केट, पुल कहां-कहां है। छोटी छोटी चीजें भी साफ होनी चाहिए।

कितनी जमीन लेनी होगी, यह तक नहीं पता
बैठक में यह साफ हो गया कि इन स्टेशनों के लिए कितनी जमीन का अधिग्रहण होगा, इसका कोई सर्वे अभी नहीं हुआ है। खास तौर पर कैंट क्षेत्र के स्टेशनों में वन विभाग, रेलवे तथा अन्य विभाग की जमीन का अधिग्रहण होगा। इस बाबत जिला भूमि व्यवस्था लिपिक को ले आउट दिया गया है। अब वहां से इसका चिन्हीकरण होगा कि कौन सी जमीन यहां सरकारी और कौन सी गैर सरकारी है। इसमें भी अभी काफी समय लगेगा।

मेरठ में सबसे लेट चल रहा काम
आगरा, कानपुर, लखनऊ तथा वाराणसी में भी मेट्रो पर काम चल रहा है पर सबसे धीमा काम मेरठ में हो रहा है। अभी तक तो डीपीआर का ड्राफ्ट तक तैयार नहीं हुआ है। पहले सितंबर तक डीपीआर का ड्राफ्ट देना था। फिर अक्टूबर का समय मांगा गया और शुक्रवार को राइट्स की टीम ने साफ कर दिया कि दिसंबर में ही यह संभव हो सकेगा। दरअसल, मेरठ में राइट्स की बड़ी टीम काम नहीं कर रही है। जीएम पीयूष कंसल को यहां की जिम्मेदारी दी गई है पर वे तो कभी कभार ही यहां आते हैं। जीओसी के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में वे नहीं आए और अपने जूनियर तरुण जैन को भेज दिया। तरुण की टीम ही यहां काम करती है।
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