मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर वेबिनार किया गया। मुख्य वक्ता मनीषा तेवतिया ने कहा कि आधुनिक तकनीक से युक्त जिंदगी मानसिक परेशानी भी बढ़ा रही है। बाहरी देशों में तो टेक्नोलॉजी से डिटॉक्स करने के लिए रिहैबिलिटेशन सेंटर बनाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हमारे देश में भी ऐसे हालात सामने आ सकते हैं। इसलिए हमें घर से ही टेक्नोलॉजिकल हाईजीन बनाने के बारे में सोचना चाहिए। बदलती जीवन शैली में नींद पूरी न होने के कारण मानसिक बीमारियां बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि हमें व्यक्तिगत जीवन में पर्याप्त नींद (स्लीप हाईजीन) के बारे में सोचना चाहिए। आज का बच्चा स्क्रीन एजर है। ज्यादा स्क्रीन टाइम भी बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बना रहा है। अगर बच्चों में सुधार लाना है तो हमें खुद में भी बदलाव लाना होगा। घर के अंदर टेक्नोलॉजी का उपयोग सोच समझ कर करें। आप जैसा करेंगे आपके बच्चे आपको फॉलो करके वैसा ही करते हैं। मगर आज पेरेंट्स खुद रील्स देखते हैं और बच्चों से कुछ और उम्मीद करते हैं। दूसरों की नकारात्मक बातों से बचने के लिए हमें सकारात्मक रहने का प्रयास करना चाहिए।
विभागाध्यक्ष प्रो. संजय कुमार ने कहा कि दुनिया में 7 से 10 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार की मानसिक समस्या से ग्रसित हैं। बच्चों एवं युवाओं में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं लगभग 14 प्रतिशत हैं। किसी भी समाज और देश के लिए यह चिंता का विषय है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए परिवार, समाज और जनहित से जुड़े कार्यों में व्यस्त रहें। योग, संगीत और अध्यात्म का भी सहारा लें। स्मृति यादव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए हमें खुद और अन्य को जागरूक करना होगा।