गंगा किनारे बाजार में जाने के लिए तैयार पड़ी खरबूजे की फसल स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में इन दिनों गंगा किनारे किसानों को खरबूजे का बदलता हुआ रंग रास आ रहा है। एक कहावत है कि खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है। परंतु यहां तो खरबूज ने किसानों का ही रंग-ढंग बदल दिया है। खरबूजे की खेती से खादर क्षेत्र में गंगा किनारे दर्जनों गांव के आसपास प्लेज लगाकर खीरा, खरबूजा और तरबूज की खेती करने वाले किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने से मालामाल हो रहे हैं। यह खेती उनके लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
गर्मी के मौसम में लू से बचाने और पानी की जरूरत को पूरा करने में सबसे ज्यादा अहमियत रखने वाले खीरा, खरबूजा और तरबूज की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ रही है। क्षेत्र के गांव तारापुर निवासी किसान विनोद कुमार ने बताया कि इस बार 16 एकड़ में खरबूजे की खेती की है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बाजार में अच्छे भाव मिल रहे हैं और खरबूजे की मांग भी कम नहीं है। इस बार 30 हजार रुपये प्रति एकड़ से ज्यादा मुनाफा होने की उम्मीद है।
किसान चंद्रपाल ने बताया कि पिछले साल जहां 10 एकड़ में खरबूजे की खेती की थी। इस बार तीन एकड़ बढ़ाते हुए 13 एकड़ में खरबूजा लगाया है। इसके अलावा पांच एकड़ में टिंडे व तीन एकड़ में खीरे की खेती भी की है। शुरुआत में तो अच्छे भाव मिले, परंतु अब खीरा व टिंडे के भाव काफी कम मिल रहे हैं। वहीं खरबूजे के साथ-साथ तरबूज भी रंग दिखा रहा है। तरबूज की बिक्री बाजार में 20 से 30 रुपये किलो तक हो रही है। इस कारण खरबूजे के साथ-साथ तरबूज से भी किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है।
आसपास के जिलों में सप्लाई होता है खरबूजा
खादर क्षेत्र में गंगा किनारे खरबूजे और तरबूज की खेती करने वाले किसानों ने बताया कि वह इन दिनों गंगा के रेत में उगने वाला खीरा, खरबूजा, ककड़ी, लौकी, तोरी, टमाटर आदि की आपूर्ति मेरठ, मुजफ्फरनगर के साथ-साथ आसपास के जिलों और दिल्ली जैसे राज्यों में भी होती है। गंगा किनारे खेती होने से आसपास के गांव के मजदूरों को काम मिला हुआ है।