गांव खटकी से मेरठ तक का सफर
तुषार गिरि मूल रूप से किला परीक्षितगढ़ क्षेत्र के गांव खटकी के निवासी हैं। उनका परिवार वर्तमान में मेरठ के शास्त्रीनगर में रहता है। उनके पिता शशिभूषण गिरि केंद्रीय विद्यालय में वाइस प्रिंसिपल हैं, जबकि माता नीता रानी गृहिणी हैं। बेटे की सफलता पर परिवार में खुशी का माहौल है।
केंद्रीय विद्यालय से लेकर NIT पटना तक की पढ़ाई
तुषार ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय मेरठ से पूरी की, जहां उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने एनआईटी पटना से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन प्रतिष्ठित कंपनी एलएंडटी (L&T)में हो गया, जहां उन्होंने कुछ समय तक नौकरी भी की।
बचपन से था सिविल सेवा में जाने का सपना
तुषार बताते हैं कि सिविल सर्विसेज में जाना उनका बचपन का सपना था। हालांकि इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने कुछ समय उद्योग जगत में अनुभव लेने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी।
योगी परमहंस से प्रेरणा
तुषार आध्यात्मिक चिंतन से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। वे योगी परमहंस के विचारों से काफी प्रभावित हैं और उनकी आत्मकथा उनकी पसंदीदा किताबों में शामिल है। स्कूल के दिनों में तुषार एक उत्साही क्रिकेट खिलाड़ी भी रहे हैं और वे मेरठ के कैलाश प्रकाश स्टेडियम में नियमित अभ्यास किया करते थे।
बेटे की सफलता पर पिता हुए भावुक
तुषार की सफलता की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल बन गया। उनके पिता शशिभूषण गिरि ने खुशी में घर पर ढोल-नगाड़े बजवाकर बेटे का जोरदार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का क्षण नहीं हो सकता।
बेटे ने न केवल परिवार बल्कि अपने गांव, स्कूल और पूरे मेरठ का नाम रोशन किया है। तुषार की इस उपलब्धि के बाद परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों में खुशी की लहर है। सभी उनकी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प की सराहना कर रहे हैं।