हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहिं ठौर...
-- परमात्मा से मिलने का मात्र साधन है गुरु
-- शनि की साढ़े साती से भी बचाएंगे गुरु
-- माता पिता के सम्मान से प्रसन्न होते हैं गुरु और आदि गुरु शिव
मेरठ।
गुरु को आदिकाल से ईश्वर का दर्जा प्राप्त है। ज्ञान रूपी प्रकाश से आलोकित करते हैं। अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करते हैं। अच्छे और बुरे में फर्क करना बताने हैं। जीवन के मूलभूत सिद्धातों से परिचित कराते हैं। गुरु के महत्ता को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि शनिवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
आषाढ़ पूर्णिमा को वेद व्यास जी का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का ज्ञान दिया और पुराणों की रचना की। उनके सम्मान में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन गुरुजनों की पूजा करने की परंपरा है। हमारा देश अनेक परंपराओं का साक्षी रहा है। इन्हीं परंपराओं में से एक है "गुरु-शिष्य परंपरा" गुरु भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा हैं और उस संस्कृति को याद रखने के लिये ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का नाम दिया गया है।
-- अंधकार से प्रकाश की ओर
गुरु पूर्णिमा का संबंध गुरु तत्व से है। अंधकार से प्रकाश की ओर गुरु ही ले जाते हैं। जो तत्व हमें ज्ञानवान बनाता है वह पूजनीय और वंदनीय हो जाता है। गुरु तत्त्व किसी भी रूप में हम लोगों के सामने आ सकता है।
-- सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग में पर्व
-- गुरु पूर्णिमा या आषाढ़ पूर्णिमा के दिन सर्वार्थ सिद्धि और प्रीति योग का शुभ संयोग बन रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि 24 जुलाई को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से प्रीति योग लगेगा। जो कि 25 जुलाई की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दिन दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से अगले दिन 25 जुलाई को सुबह 05 बजकर 39 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा। ये दोनों योग शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए उत्तम माने जाते हैं।
-- शनि देव की पूजा का विशेष संयोग
-- गुरुपूर्णिमा आदि गुरु शिवजी और वेदव्यास की आराधना का पर्व है लेकिन इस बार शनिदेव को प्रसन्न करने का भी शुभ योग है। महामंडलेश्वर महेंद्र दास जी ने बताया कि शनि की साढ़े साती जातक पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में जातक की कुंडली में शनि की कुदृष्टि भी है तो परेशानियां और बढ़ सकती हैं। शनिदेव से जुड़े विशेष योग निर्माण के समय कुछ उपाय करने से राहत मिलेगी। इस बार गुरु पूर्णिमा पर शनि पूजा का ऐसा ही विशेष योग है। ऐसे में साढ़े साती झेल रहीं धनु, मकर और कुंभ और ढैय्या से प्रभावित मिथुन और तुला राशि के लोगों को शनिदेव की विशेष पूजा करनी चाहिए।
-- धर्मग्रंथ साक्षात गुरु
-- घर में रामचरितमानस, श्रीमद्भगवद्गीता हो या कोई भी धार्मिक पुस्तक हो उसको पूजा स्थान में रखकर उसमें पुष्प चढ़ाए उनको लाल कपड़े से लपेटें। उनको प्रणाम करिए और थोड़ा समय निकालकर उसका पाठ करिए। धर्मग्रंथ भी साक्षात गुरु हैं।
-- गौ माता का ले आशीर्वाद
गाय का आशीर्वाद लेना बहुत ही आवश्यक है गुरु को रिप्रेजेंट गौमाता ही करती है। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि गौ माता के समक्ष जाकर उनको भरपेट भोजन कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। उसके पश्चात प्रणाम करके गौ की परिक्रमा करके जीवन में जो भी गलतियां की है उसकी क्षमा मांगते हुए उनका आशीर्वाद लेना चाहिए।