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नौकरी जरूरी, पर इबादत करतीं हैं पूरी, रमजान में जॉब के साथ रोजे भी रख रहीं कामकाजी महिलाएं

Sun, 26 May 2019 05:14 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शिक्षिकाएं जो नौकरी के साथ रमजान में रोजे भी रख रही हैं। - फोटो : अमर उजाला
रमजान के पाक महीने में हर आयु और वर्ग का इंसान इबादत में रमा है। अलसुबह उठकर सहरी और नमाज़ को पूरा करना। दिन में नमाज फिर शाम को इफ्तारी की व्यवस्था करना। कामकाजी महिलाएं भी खुदा की इबादत में लगी हुई हैं। इसके लिए वे घर का काम, ऑफिस सब एक साथ मैनेज कर रही हैं। हर व्यक्ति की पसंद का ख्याल रखते हुए इफ्तारी में व्यंजन बनाती हैं। कामकाजी महिलाएं एक साथ तीन जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। उनके अनुसार रोजे के नियमों को बखूबी पूरा करने के लिए खुदा हमें ताकत देते हैं। नौकरी और घर के कामों में वक्त कब कट जाता है पता नहीं चलता, थकान भी नहीं होती।
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शिक्षिका एलिज़ा रेहान - फोटो : अमर उजाला
स्कूल में गुजर जाता  है टाइम
ब्लॉसम्स स्कूल में शिक्षिका एलिज़ा रेहान कहती हैं स्कूल में वक्त ऐसे निकल जाता है कि भूख, प्यास महसूस ही नहीं होती। जब घर जाती हूं तो थकान और भूख लगती है। उसके बाद नमाज़ की तैयारी करते हैं। बच्चों को पढ़ाने से भी अच्छा लगता है और वक्त भी कट जाता है।
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इरम जहां- शिक्षिका - फोटो : अमर उजाला
पता नहीं चलता कब दिन गुजर गया
इरम जहां इस्माईल नेशनल महिला डिग्री कॉलेज में शिक्षिका हैं। बताया कि स्कूल में समय का पता ही नहीं चलता कि वक्त कब कट जाता है। शाम को थकान महसूस होती है। लेकिन इबादत के आगे सारी थकन मिट जाती है। अच्छा लगता है कि अपने  काम के साथ हम थोड़ी सी इबादत भी कर लेते हैं।

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जैनब नकवी - फोटो : अमर उजाला
खुशी का अहसास होता है
जैनब नकवी पेशे से वकील हैं। कहा कि हौसले के आगे सारी मुश्किलें ढेर हो जाती हैं। कचहरी के लिए निकलती हूं तो थोड़ा भूख महसूस होती है। लेकिन इसके बाद सारा दिन काम में व्यस्त रहने के कारण निकल जाता है। इसी बहाने थोड़ी सी डाइटिंग भी हो जाती है।
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ramadan, Ramadan, ramzan - फोटो : अमर उजाला
आराम से निकल जाता है दिन 
काम में सारा दिन कैसे निकल जाता है, पता ही नहीं चलता। सुबह ऑफिस के बाद रोज के काम में वक्त निकल जाता है। रोजे में भूखे रहने के बाद भी थकान या भूख का अहसास नहीं होता। सहरी के लिए कुछ अच्छा पकाना आनंद की अनुभूति देता है। -समीना अली खान, कर्मचारी, आयकर विभाग
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मदीना शहर रसूल - फोटो : अमर उजाला
थकान नहीं होती
गर्मियों की छुट्टियों में मुझे ज्यादा से ज्यादा कार्यशालाएं करानी होती हैं। मेरे काम का मुख्य सीजन यही है और इसी सीजन में रोजे भी हैं। परिवार संभालना होता है। काम के सिलसिले में दूसरे शहरों में भी जाना पड़ता है। लेकिन रोजे के साथ अपने काम और परिवार की देखभाल में वक्त कट जाता है। कभी थकान महसूस नहीं होती। -मदीना शहर रसूल, इमेज कंसलटेंट  
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