तीरगरान में इसी जगह बनाई जा रही थी प्याऊ। (फाइल फोटो)
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एसपी क्राइम शिवराम यादव ने बताया कि तीरगरान बवाल की जांच अभी क्राइम ब्रांच में चल रही है। घटना के दौरान हालात को देखते हुए दोनों समुदाय के एक-एक युवक को आरोपी बनाया गया था। जिसमें समसुद्दीन व नवीन चिकल्ला पर रासुका की कार्रवाई हुई है। तीरगरान बवाल का असली आरोपी कौन है, यह तो न्यायालय ही तय करेगी। फिलहाल पुलिस की विवेचना जारी है और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाई जा रही है। कई बवालियों को धारा 41 का नोटिस भी दिया गया है।
हिंसा का शिकार हुए निर्दोष शुभम के परिवार को आज भी इंसाफ का इंतजार
इस हिंसा में बेकसूर शुभम रस्तोगी मारा गया था। इस मुकदमे में बिलाल, मतलूब, सुल्तान व खालिद उर्फ अंडा नामजद हुए थे। इन चारों आरोपियों के खिलाफ अलग से जांच हुई थी। लेकिन चार साल बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला। एक-एक करके सभी आरोपी जमानत पर छूटकर आ गए। बताया गया कि मेरठ पुलिस की जांच सिर्फ शुभम हत्याकांड पर टिकी है। पुलिस दूसरे बिंदुओं पर जांच ही नही कर रही है। मुकदमा एडीजे-11 की कोर्ट में विचाराधीन है।
नहीं मिली नौकरी, परिवार में आक्रोश
शुभम की हत्या के बाद पुलिस-प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया था कि शुभम की बहन प्राची को सरकारी नौकरी दिलाएंगे। आज तक पीड़ित परिवार को पुलिस-प्रशासन से न तो इंसाफ मिला और न ही नौकरी मिली। हालांकि पुलिस का दावा है कि शुभम के हत्यारोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत जुटाए हैं। पुलिस-प्रशासन के इस रवैये को लेकर आज भी सुशील रस्तोगी और उनके परिवार में आक्रोश है।
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