पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी 25 दिसंबर से शुरू हो रही है। जन्मशती पर वर्षभर स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रमों का आयोजन होगा। मेरठ से अटल बिहारी वाजपेयी के कई संस्मरण जुड़े हैं।
भारतीय जनसंघ से लेकर भाजपा की मेरठ में जनसभाओं को उन्होंने संबोधित किया। 1985 में अटल बिहारी ने मेरठ जनपद (बागपत भी शामिल) में एक दिन में 13 सभाओं को संबोधित किया। 1977 में जिमखाना मैदान की सभा में मंच पर चढ़ने को लेकर 74 वर्षीय भाजपा नेता अरुण वशिष्ठ से अटल बिहारी की कहासुनी हो गई थी।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का मेरठ में लगातार आना होता रहा। चुनावी सीजन में उन्होंने मेरठ में अनेक सभाओं को संबोधित किया। 25 दिसंबर को उनकी जयंती को सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाएगा। राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री मेरठ की गजक और गाजर के हलवे के शौकीन थे। जब भी मेरठ आते थे तो यहां से गजक और हलवा साथ ले जाते थे।
अपने भाषण के लिए अटल बिहारी पूरे देश में प्रसिद्ध थे। उन्हें सुनने के लिए बागपत तक से लोग मेरठ आते थे। 1984 में मवाना की सभा में ही उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि ‘आज लहर किसी की हो, एक दिन समय हमारा होगा।’ देश की राजनीति के लिए हमने सब कुछ एक कर दिया। एक दिन यही भाजपा अपने शिखर तक पहुंचेगी।’ आज उनकी भविष्यवाणी सच साबित हो रही है।
अटल बोले, इससे अच्छा तो पैदल ही शहर में घुमा देते
13 का संयोग अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जीवन भर जुड़ा रहा। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण वशिष्ठ बताते हैं कि 1985 में अटल बिहारी ने मेरठ में 13 सभाओं में भाग लिया। मेरठ में जिमखाना मैदान, सिसौली, माछरा, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, लावड़, दौराला, सरधना, बिनौली, बड़ौत, बागपत और खेकड़ा में जनसभाओं को संबोधित किया। खेकड़ा की सभा में उन्हें रात हो गई। तब उन्होंने कहा कि एक दिन में 13 सभाओं को मैं भूल नहीं सकता, इससे अच्छा तो मुझे पैदल ही शहर घुमा देते। खेकड़ा में ही उन्होंने रात का भोजन किया और मनपसंद खीर खाई।
अरुण वशिष्ठ को मंच पर चढ़ने से रोका
अरुण वशिष्ठ बताते हैं कि आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार में अटल बिहारी विदेश मंत्री बनने के बाद जिमखाना मैदान में जनसभा को संबोधित करने आए थे। आपातकाल में लोगों पर अत्याचार करने वाले अधिकारियों को प्रोन्नत किया गया तो लोगों में आक्रोश व्याप्त था। विरोध दर्ज कराने के लिए जब अरुण मंच पर चढ़ने लगे तो अटल बिहारी को लगा कि वे अनाधिकृत रूप से आ गए हैं। अटल बिहारी ने अरुण को मंच पर चढ़ने से रोक दिया। इससे माहौल गर्मा गया। बाद में गलतफहमी दूर होने पर अटल बिहारी ने अरुण वशिष्ठ को मंच पर बुलाया। मंच पर बुलाकर विरोध ज्ञापन लिया और फिर मंच पर ही बैठा लिया।
आपातकाल में भी गूंजे अटल के भाषण
विहिप नेता कुंवर शीलेंद्र चौहान बताते हैं कि आपातकाल के दौरान भी ऑडियो कैसेट के जरिए अटल बिहारी वाजपेयी के भाषण गांव-गांव गूंज रहे थे। संघ के स्वयंसेवकों ने उन्हें भाषण का कैसेट लाकर दिया, जिसे वे खुद पुलिस से बचकर गांवों में ले जाकर लोगों को सुनाया करते थे। लोग खुद ही उनसे कहकर उनके भाषण सुनते।
चप्पल गुम हुईं तो कहा- भरत खड़ाऊ ले गया
सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि मवाना में जनसभा के बाद मंच से उतरते समय अटल बिहारी के साथ वे भी सीढ़ियों पर खड़े हो गए। इस पर अटल बिहारी ने कहा कि एक म्यान में दो तलवारें कैसे यानि एक सीढ़ी पर दो वाजपेयी कैसे। मंच से उतरकर देखा तो डॉ. लक्ष्मीकांत की चप्पलें गुम थीं, इस पर अटल जी बोले कि कोई भरत खड़ाऊ ले गया है, समय पर वापस करेगा। लक्ष्मीकांत कहते हैं कि अटल बिहारी के आशीर्वाद से ही वे दोबारा खड़े हुए हैं।