सुबह और शाम के समय मौसम कुछ ठंडा है, मगर दिन के समय धूप सताने लगी है। इस कारण खेतों में नमी सूख रही है। गेहूं, सरसों और सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
फरवरी के महीने का आज आखिरी दिन है और अभी से पारा 30 डिग्री पर पहुंच गया है। गर्मी ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल में देखने को मिलते हैं। सुबह की हल्की ठंडक भी दोपहर की चुभती धूप में बदल रही है। मौसम का यह असामान्य और तेज़ बदलाव न केवल आम नागरिकों के लिए असुविधाजनक है, बल्कि किसानों के लिए गहरी चिंता का सबब भी बन गया है।
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फसलों पर मंडराया संकट: गेहूं, सरसों और सब्जियों पर असर
दिन में पड़ने वाली तेज़ धूप और रात के तापमान में अपेक्षित गिरावट न होने के कारण खेतों की नमी तेज़ी से सूख रही है। गेहूं की फसल, जो इस समय दाना भरने की महत्वपूर्ण अवस्था में है, विशेष रूप से प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो गेहूं के दाने पतले रह सकते हैं, जिससे उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
इसके अलावा, सरसों और विभिन्न प्रकार की सब्जी की फसलों पर भी इस मौसम के असामान्य परिवर्तन का असर दिखाई देने लगा है। किसानों का कहना है कि उन्हें समय से पहले ही अपनी फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे पानी की खपत बढ़ गई है और अतिरिक्त मेहनत भी करनी पड़ रही है।
मौसम वैज्ञानिकों की राय
सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर यूपी शाही के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता में कमी और आसमान साफ रहने के कारण धूप की तेज़ी बढ़ गई है। फिलहाल तापमान में गिरावट के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। यदि मार्च की शुरुआत में ही पारा 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है, तो यह आने वाले महीनों में भीषण गर्मी के संकेत के रूप में देखा जाएगा। यह स्थिति कृषि के लिए निश्चित रूप से चिंताजनक है और किसानों को अपनी फसलों के बचाव के लिए अतिरिक्त उपाय करने पड़ सकते हैं।