फरवरी माह का पहला सप्ताह चल रहा है और ठंड व कोहरा लगातार बना हुआ है। सुबह और शाम के समय कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम है। ऐसे मौसम में सांस के रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
उत्तर भारत के कई हिस्सों समेत मेरठ में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। सुबह के समय दृश्यता इतनी कम हो गई है कि सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई है, जिससे दैनिक कामकाज में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है। दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों और खासकर वाहन चालकों को कोहरे के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, आने वाले 24 घंटों तक इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना है। ठंड और कोहरे की दोहरे मार के कारण न केवल यातायात प्रभावित हुआ है, बल्कि प्रदूषण का स्तर भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर एम. शमीम ने बताया कि वर्तमान में कोहरे का यह क्रम जारी रहेगा। नमी की मात्रा बढ़ने के कारण मौसम में ठंडक बनी हुई है और तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस सर्द मौसम को देखते हुए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और गर्म कपड़े पहनें।
कोहरे और ठंड के प्रभाव
दृश्यता में कमी: सड़कों पर दृश्यता अत्यधिक कम हो जाती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
यातायात व्यवधान: वाहनों की गति धीमी हो जाती है, जिससे यात्रा के समय में वृद्धि होती है और दैनिक कार्यक्रम प्रभावित होते हैं।
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं: ठंड बढ़ने से श्वसन संबंधी बीमारियां, सर्दी-जुकाम और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
प्रदूषण में वृद्धि: कोहरे के साथ प्रदूषक तत्व हवा में अधिक समय तक बने रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता खराब होती है।
रोजमर्रा के कामकाज पर असर: सुबह के समय बाहर निकलने में लोगों को कठिनाई होती है, जिससे उनके दैनिक दिनचर्या पर असर पड़ता है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें, खासकर सुबह और शाम के समय। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। यदि आवश्यक न हो तो सुबह के समय बाहर निकलने से बचें। सांस संबंधी समस्या वाले व्यक्ति अपने इनहेलर या आवश्यक दवाएं साथ रखें।