पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों में ठंड लगातार बनी हुई है। खास तौर से मजदूर तबके के लोग, जो कड़ाके की सर्दी में सुबह काम पर जाते हैं उनको बेहद परेशानी हो रही है। रिक्शा चालक अलाव का सहारा लेते दिख रहे हैं।
उत्तर भारत इस समय कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। लगातार गिरते तापमान और सर्द हवाओं के कारण लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। सुबह और रात के समय तो ठंड का प्रकोप अपने चरम पर है, जिससे लोग ठिठुरने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने 20 जनवरी के आसपास कुछ राहत मिलने की संभावना जताई है।
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घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, खासकर दिल्ली-देहरादून हाईवे जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई है। चालकों को लाइट जलाकर धीमी गति से यात्रा करनी पड़ रही है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। सुबह के समय कोहरे की चादर इतनी मोटी होती है कि कुछ मीटर आगे देखना भी मुश्किल हो जाता है। इससे न केवल लंबी दूरी की यात्रा करने वाले बल्कि स्थानीय आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।
मजदूर वर्ग और आम जनमानस पर सर्वाधिक मार
ठंड और कोहरे का सबसे अधिक असर मजदूर वर्ग, रिक्शा चालकों और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है। इन लोगों के लिए ठंड से बचाव के साधन सीमित हैं और काम की तलाश में इन्हें कड़ाके की ठंड में भी बाहर निकलना पड़ता है। अलाव जलाकर ठंड से बचने की कोशिशें भी नाकाफी साबित हो रही हैं।
स्वास्थ्य पर ठंड का प्रभाव
बढ़ती ठंड के साथ ही अस्पतालों में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी इजाफा देखा जा रहा है। रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संजीव शर्मा ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने गर्म कपड़े पहनने, ठंडे पेय पदार्थों और भोजन से परहेज करने तथा सुबह-शाम अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
मौसम वैज्ञानिकों की राय और प्रशासन से अपेक्षाएं
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर एम शमीम के अनुसार, अगले दो दिनों तक कोहरे और ठंड से राहत मिलने की संभावना बहुत कम है। न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए, प्रशासन से रैन बसेरों की व्यवस्था बढ़ाने, पर्याप्त संख्या में अलाव जलाने और जरूरतमंदों के लिए गर्म कपड़ों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है, ताकि ठंड से किसी की जान न जाए।