डीपीआर के बाद शुरू होगा निर्माण
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित कार्यदायी संस्था को सात महीने के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करनी होगी। डीपीआर को मंजूरी मिलने के बाद रनवे के निर्माण का काम शुरू किया जाएगा। परियोजना को प्रोजेक्ट शिवालिक के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।
900 एकड़ में बनेगा 2110 मीटर लंबा रनवे
किला रोड स्थित मिलिट्री फार्म की करीब 900 एकड़ जमीन पर 2110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे बनाया जाएगा। परियोजना में दो हैंगर भी प्रस्तावित हैं। इनकी लंबाई 50 मीटर और चौड़ाई 60 मीटर होगी। यहां विमानों और ड्रोन को रखने की सुविधा विकसित की जाएगी।
सी-295 और सी-130 जैसे विमान भी हो सकेंगे संचालित
प्रस्तावित रनवे पर रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के साथ सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों के संचालन की योजना है। इसे भारतीय सेना के लिए एक रणनीतिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। ड्रोन संचालन, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।
सुरक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन तक होगा इस्तेमाल
मेरठ में बनने वाले इस रनवे का उपयोग केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल सैन्य निगरानी, ड्रोन और मानव रहित विमानों के प्रशिक्षण व परीक्षण, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य तथा दूरदराज के क्षेत्रों तक जरूरी सामग्री पहुंचाने में भी किया जा सकेगा।
बदलते युद्ध के दौर में बढ़ेगी रणनीतिक अहमियत
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मेरठ में यूएवी और ड्रोन के लिए समर्पित रनवे को भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद सैन्य निगरानी और मानवरहित विमानों के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा तैयार होगा।