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सोने के बाद अब चमड़ा नगरी कहलाएगा मेरठ

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meerut to be called leather town
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मेरठ। आगरा, कानपुर की तर्ज पर मेरठ में भी लेदर गुड्स डेवलपमेंट क्लस्टर की शुरूआत होने वाली है। यहां जूतों से लेकर लेदर ज्वैलरी, बैग, पर्स और जैकेट बनाने का काम होगा। जानी टीकरी में डेढ़ बीघा से अधिक भूमि पर करीब 15 करोड़ की लागत से लेदर गुड्स क्लस्टर का निर्माण होगा। इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट जिला उद्योग विभाग द्वारा शासन को भेजने की तैयारी है।
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इस परियोजना पर संयुक्त सूक्ष्म उद्योग क्लस्टर विकास संघ एवं लेदर गुड्स डेवलपमेंट क्लस्टर मिलकर काम कर रहे हैं। 600 से अधिक चमड़ा कारीगरों का सर्वे कराकर डीपीआर बन चुकी है। डिटेल स्टडी रिपोर्ट कानपुर मुख्यालय से पास होकर जीएम डीआईसी को सौंपी जा चुकी है। शासन से हरी झंडी का इंतजार है। इसके बाद केंद्र से स्वीकृ ति ली जाएगी। क्लस्टर में सामान के निर्माण, डिजायनिंग के अलावा मार्केटिंग व सेलिंग का काम होगा। कारीगरों से तैयार माल लेकर उसकी बिक्री का काम क्लस्टर के जरिए होगा। एसपीवी परियोजना के सदस्य रविंद्र सिंह ने बताया कि नियमानुसार हम 10 प्रतिशत शेयर देने को राजी हैं। डीपीआर उद्योग निदेशालय उप्र सरकार व केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। क्लस्टर परियोजना के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर स्थापित कराया जाएगा।
150 करोड़ टर्नओवर की बनेगी इंडस्ट्री
डीपीआर बनाने वाले आशुतोष अग्रवाल के अनुसार, जिले में वर्तमान में ढाई लाख कारीगर वह व्यापारी हैं, जो चमड़ा उद्योग से जुड़े हैं। ये लोग चमड़े की सफाई से लेकर, डिजायनिंग, सिलाई, कटाई, बुनाई का काम करते हैं। बैग, जूते, पर्स व एसेसरीज के अलावा गेंदों में मुख्य रूप से चमड़े का प्रयोग होता है। खेल उपकरणों में भी चमड़े का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान में 100 करोड़ का टर्नओवर है। अगर क्लस्टर बनता है तो यह इंडस्ट्री 150 करोड़ तक की ग्रोथ करेगी।
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सिलाई से लेकर डिजायनिंग, एंब्रायडरी होगी
क्लस्टर विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल के अनुसार, क्लस्टर में चमड़े की सफाई नहीं बल्कि डिजायनिंग, एंब्रायडरी व अन्य काम भी होंगे। क्लस्टर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर, क्वालिटी लैब, ट्रेनिंग सेंटर, वेयर हाउस व रिफाइनिंग लैब होगी। जूते के सोल की पेस्टिंग, लेदर कटिंग, स्टीचिंग मशीन, एंब्रायडरी मशीन, लेदर पॉलिशिंग मशीन, लेजर कटिंग, लेदर डिजायनिंग कंप्यूटराइज लैब, टेस्ट लैब आदि होगी। कच्चा माल रखने के लिए गोडाउन होगा। चमड़े की रिफाइनिंग होगी। प्रशिक्षण सेंटर में युवाओं को लेदर एसेसरीज बनाने के काम की ट्रेनिंग दी जाएगी। चमड़े से बेल्ट, कीरिंग, पर्स, स्कूल बैग, स्पोर्ट्स उपकरण, जूते, लेदर जर्सी बनेंगी।
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