ग्रामीणों में जगी नई उम्मीद
मीठेपुर निवासी 65 वर्षीय अजयवीर ने बताया कि बचपन में उन्होंने काली नदी को पूरे वेग से बहते देखा था। शनिवार सुबह देदवा गांव के पास नदी को उसी पुराने स्वरूप में देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उनका कहना है कि वर्षों बाद ऐसा नजारा देखने को मिला है।
देदवा गांव निवासी और दौराला ब्लॉक प्रमुख के पति ऋषिपाल भंडारी ने कहा कि यदि मानसून के दौरान इसी तरह कुछ और अच्छी बारिश होती रही और नदी के प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण किया गया, तो काली नदी दोबारा अपने पुराने स्वरूप में लौट सकती है।
अभियानों से नहीं मिला परिणाम, प्रकृति ने बदली तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं ने समय-समय पर काली नदी के पुनर्जीवन के लिए सफाई अभियान चलाए और कई योजनाएं भी बनाई, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इस बार लगातार हुई बारिश ने वह कर दिखाया, जिससे लोगों में नदी के पुनर्जीवन की नई उम्मीद जगी है।