राज्यपाल ने कहा कि जिन लोगों के पास आवास नहीं थे, उस परिवार को प्रधानमंत्री आवास मिलने से क्या लाभ हुआ, क्या इसका किसी ने आकलन किया।
कुपोषित बच्चों को लेकर क्या किसी ने स्टडी की। स्वच्छ जल घर घर जाने से क्या हुआ, बीमारी घटी क्या। इन सब पर प्रोजेक्ट तैयार करें। चाहरदीवारी कर अंदर बैठे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि पश्चिम हर क्षेत्र में समृद्ध है। ऐसे में यहां के विद्यार्थी कुछ अलग करें। किसी प्राइमरी स्कूल को गोद लें। इस यूनिवर्सिटी को इन सभी प्रॉजेक्ट पर कार्य कटेंगे तो यूनिवर्सिटी के लिए मिशाल बनेगी। कहा की यूपी में सबसे ज्यादा आबादी है तो सबसे ज्यादा जिम्मेदारी भी यूपी की है। आज जो गोल्ड मेडल मिला है, उसको लेकर मां-पिता से जरूर बात करेगा। आज जब कुछ लड़कों ने हमारे पैर छुए तो हब यही कहा कि घर जाकर माता-पिता के पैर जरूर छूना।
131193 छात्र-छात्राओं को मिलीं डिग्री
दीक्षांत समारोह में 195 छात्र-छात्राओं को 228 स्वर्ण पदक-विशिष्ट योग्यता प्रमाण पत्र मिले। यूजी-पीजी के 131193 छात्र-छात्राओं को उपाधियां मिलेंगी। इनमें लड़कों की संख्या 43534 (33 फीसदी) और लड़कियों की संख्या 87659 (68.82 फीसदी) है। 234 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की उपाधि मिली। एक कुलाधिपति स्वर्ण पदक, एक राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक, दो चौधरी चरण सिंह स्मृति प्रतिभा पुरस्कार, 59 प्रायोजित स्वर्ण पदक, 165 कुलपति स्वर्ण पदक दिए गए। इनके अलावा वर्ष 2021 के प्रायोजित मेडल भी दिए गए। 44 छात्र-छात्राओं की पीएचडी उपाधि पर भी मुहर लगी।
स्क्रीन पर दिखाया गया विवि का इतिहास
दीक्षांत समारोह को इस बार और भव्य बनाया गया। सीसीएसयू के इतिहास को डॉक्यूमेंट्री के जरिए स्क्रीन पर दिखाया गया। इसमें विवि के सफर को बयां किया गया। प्रेक्षागृह के प्रवेश द्वार पर इस बार फोटो गैलरी लगाई गई। पानी का महत्व बताते हुए इस बार जल भरो कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी विद्यालय के 25 बच्चों को कुलाधिपति किट दी।
स्क्रीन लगाकर किया गया लाइव प्रसारण
स्क्रीन लगाकर दीक्षांत समारोह का लाइव प्रसारण सीसीएसयू के यूट्यूब चैनल पर किया गया।
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समारोह में मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के अध्यक्ष पदमश्री डॉ. जेके बजाज ने छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा किभारतीय परंपरा में और भारतीय सभ्यता के मूलभूत साहित्य में दीक्षांत को बहुत महत्त्व दिया गया है। यह वह संधिवेला है। जब आप जीवन की एक अवस्था को पूर्ण कर दूसरी में प्रवेश करते हैं। ब्रह्मचर्याश्रम से गृहस्थाश्रम की ओर बढ़ते हैं। अब तक आप विद्यार्थी थे। अपने भरण एवं संरक्षण के लिये परिवार-समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर थे। दीक्षांत के पश्चात् आप स्वयं जीविकोपार्जन करेंगे, अर्थोपार्जन करेंगे न केवल अपने अपितु परिवार समाज एवं राष्ट्र के भरण-पोषण में भी समर्थ बनेगे। अब तक आप अन्यों पर निर्भर थे। अब अन्य आप पर निर्भर होंगे।
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प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि जो छात्र-छात्राएं उपाधि लेकर जा रहे हैं वह अपने विश्वविद्यालय के लिए भविष्य में कुछ न कुछ जरूर करें। विवि को अपना घर समझकर किसी न किसी रूप में अपना योगदान दें। वे यहां पढ़ाने भी आ सकते हैं। रिसर्च में योगदान दे सकते हैं। एक बार स्वर्ण पदक लेकर चले गए ऐसा न करें, यहां अक्सर आते रहें। यह सभी विवि परिवार का हिस्सा हैं। वे विवि को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव भी दें।