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सॉल्वर गैंग पर भारी पड़ रहा एसटीएफ का होमवर्क, गोपनीय ऑपरेशंस से तोड़ी माफिया की कमर

Thu, 17 Jan 2019 11:02 AM IST
Dimple Sirohi मनु चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के गठन को प्रदेश में बीस साल पूरे हो गए हैं। शुरूआत में इस विंग को भले ही यह माना गया कि यह टीम प्रदेश से कुख्यातों का सफाया करने के लिए बनाई गई है। लेकिन बदलते समय में इस ऑपरेशनल एजेंसी ने नई तकनीक अपनाकर ऐसा होमवर्क किया कि सॉल्वर गैंग की कमर तोड़ दी। एसटीएफ मेरठ यूनिट के गोपनीय ऑपरेशन ऐसे माफिया पर भारी पड़ रहे हैं, जो परीक्षा की साख को दांव पर लगाते हुए आ रहे थे।

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एसटीएफ मेरठ यूनिट ने 11 ऐसे गैंगों का पर्दाफाश किया जिसकी गूंज लखनऊ और दिल्ली तक हुई। साल 2018 में एसएससी की परीक्षा में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच हाथ मलती रह गई और मेरठ एसटीएफ ने दिल्ली से ही पांच लोगों को 21 लाख रुपये के साथ गिरफ्तार कर खूब वाहवाही बटोरी।

एक जनवरी 2018 से 15 जनवरी 2019 तक मेरठ यूनिट की एसटीएफ सॉल्वर गैंग से जुड़े 53 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। 27 मार्च 2018 को एसटीएफ ने चौधरी चरण सिंह विवि कैंपस से छात्रनेता कविराज समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर एमबीबीएस, एलएलबी, स्नातक और परास्नातक की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने का खुलासा किया। खुद छात्रनेता ने माना था कि वह करीब 600 से ज्यादा छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं बदल चुका था। 

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यह भी हुए प्रमुख खुलासे
अप्रैल 2018 में एसटीएफ ने दिल्ली में छापा मारकर एसएससी की परीक्षा में धांधली कराने के नाम पर सॉल्वर गैंग के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। यह गैंग गाजियाबाद, मेरठ, दिल्ली के अलावा कानपुर के अभ्यर्थियों से मोटी रकम ले चुका था। जून और अक्तूबर 2018 में एसटीएफ ने यूपी पुलिस में सिपाही भर्ती के नाम पर सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया था, जिसमें अलग-अलग परीक्षाओं में नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई, इनमें एक निजी संस्थान का मैनेजर भी गिरफ्तार हुआ था।

सितंबर 2018 में एसटीएफ ने पीजीटी पेपर आउट के मामले में भी चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। 26 नवंबर 2018 को एसटीएफ ने कंकरखेड़ा से रिटायर्ड फौजी समेत तीन आरोपियों को पकड़ा था। यह गिरोह सेना में भर्ती कराने के नाम पर करीब 80 युवाओं से मोटी रकम वसूल चुका था। 13 जनवरी को नलकूप ऑपरेटर की भर्ती परीक्षा में भी सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया।

इसके अलावा रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा, ग्राम विकास अधिकारी, यूपीएसएसएसी की परीक्षा में सॉल्वर गैंग को गिरफ्तार किया। सॉल्वर गैंग के अलावा पेट्रोल पंपों से चिप लगाकर तेल चोरी का फर्जीवाड़ा, पूठा में तेल डिपो के आसपास टैंकरों से तेल चोरी का खुलासे के अलावा फर्जी मार्कशीट के दो बड़े गिरोह का भी खुलासा किया गया। 
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सर्विलांस पर फोकस
2006 बैच के पीपीएस अधिकारी बृजेश कुमार सिंह मेरठ और सहारनपुर में सीओ रह चुके हैं। इस समय एसटीएफ मेरठ यूनिट के सीओ का कार्यभार देख रहे हैं। उनका कहना है कि एसटीएफ साक्ष्य के आधार पर ही गिरफ्तारी करती है। मुखबिर तंत्र के अलावा सर्विलांस सिस्टम से पूरा फोकस रहता है।

सॉल्वर गैंग से जुड़ा मामला हो या फिर अन्य किसी भी फर्जीवाड़े में गिरफ्तारी। साक्ष्य के साथ गिरफ्तारी एक चुनौती होती है, एसटीएफ दिखावे के तौर पर काम नहीं करती। सिर्फ साक्ष्य के आधार पर ही सीधा हाथ डालती है।

मुखबिर से पूरी रेकी की जाती है। एसटीएफ की गिरफ्तारी का यह तरीका है कि किसी भी परीक्षा में शिक्षण संस्थान के गेट या परीक्षा केंद्र से आरोपी को पूरे साक्ष्य के साथ गिरफ्तार कर लिया जाता और आसपास के लोगों को भनक तक नहीं लगती। 

हर मूवमेंट पर रहती है नजर  
एसटीएफ का पूरा ऑपरेशन गोपनीय रहता है। जब भी किसी गिरोह के नेटवर्क पर एसटीएफ काम करती है तो रेकी के साथ पूरे मूवमेंट में टीम लगी होती है। 

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