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Meerut: 'एसएसपी ने हमें अपने कार्यालय में पीटा, यातनाएं दीं', किसान नेताओं ने लगाया आरोप; ये बताई वजह

Fri, 21 Aug 2026 12:56 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

दलित छात्रा की हत्या के मामले में समाज के लोगों ने कलक्ट्रेट गेट पर हंगामा-प्रदर्शन किया था। एसएसपी रहे अविनाश पांडेय ने प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारे थे। उस मामले में किसान नेता दिग्विजय भाटी को भी नामजद किया गया था। दिग्विजय भाटी एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। वहीं एक अधिवक्ता रवि गौतम ने अविनाश पांडेय के खिलाफ धरना शुरू कर दिया है। 
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कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठे अधिवक्ता रवि गौतम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव ने एसएसपी अविनाश पांडेय और सिविल लाइन थाने के प्रभारी अखिलेश गौड़ पर पीटने और यातनाएं देने का आरोप लगाया है। आरोप है कि उन्हें बुधवार रात सिविल लाइन थाने ले जाया गया। यहां पर मेडिकल कराने के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
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भाटी के अनुसार, बुधवार को वह मोहित जाटव के साथ एसएसपी कार्यालय गए थे। एसएसपी अविनाश पांडेय उस वक्त कार्यालय में नहीं थे। उनके पहुंचने के पांच मिनट बाद एसएसपी आ गए और एक सिपाही से आवाज लगवाकर उन्हें अंदर बुलवाया। यहां दोनों ने अपना परिचय दिया। आरोप है कि भाटी का नाम सुनते ही एसएसपी भड़क गए और कहा कि तुम वही हो, जिसने कलक्ट्रेट गेट पर हंगामा किया था। आरोप है कि कार्यालय में ही एसएसपी ने दोनों को पीटा।
 

इसके बाद सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ एसएसपी कार्यालय पहुंचे। वह उन्हें स्वॉट कार्यालय पुलिस लाइन लेकर गए। यहां अखिलेश गौड़ और उनकी टीम ने भी मोहित और भाटी की पिटाई की। रात में उन्हें सिविल लाइन थाने ले जाया गया। आरोप है कि पिटाई से उनकी आंखों से खून आ गया। इसके बाद पुलिस ने आंखों और दिमाग के डाक्टरों को थाने में बुलाया। उन्होंने हालत गंभीर बताई। इसके बाद इंस्पेक्टर ने भाटी के परिजनों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया।
 
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कमिश्नरी पार्क में धरने पर बैठे रवि गौतम
कलक्ट्रेट गेट पर बवाल करने के आरोपी रवि गौतम कमिश्नरी पार्क में बृहस्पतिवार रात को धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि एसएसपी का तबादला हो गया है, लेकिन इस तबादले की कार्रवाई से वह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एसएसपी अविनाश पांडेय और एसपी देहात अभिजीत के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होनी चाहिए। आय से अधिक संपत्ति की जांच भी कराई जाए। 

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