11 वर्ष के अंतराल के बाद सोमवार को सूर्य पर धब्बे दिखाई दिए। एनएएस इंटर कॉलेज में जिला विज्ञान समन्वयक दीपक शर्मा ने इस दुर्लभ घटना को पांच इंच के इक्वेटोरियल सेलेस्टरॉन टेलीस्कोप के जरिए छात्रों को दिखाया। छात्र इस घटना को देखकर आश्चर्यचकित रह गए।
टेलिस्कोप से सूर्य को देखते स्टूडेंट्स।
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जिला विज्ञान समन्वयक और एनएएस इंटर कॉलेज के विज्ञान शिक्षक दीपक शर्मा ने बताया कि सूर्य पर धब्बे दिखाई देने की घटना प्रत्येक 11 वर्ष बाद दोहराई जाती है। यह 11 वर्ष की सोलर साइकिल होती है और सन स्पॉट अचानक दिखने लगते हैं। हीलियम गैस की वजह से सूर्य से आग की लपटें निकलती रहती है, जिन्हें हम इलेक्ट्रो मैग्नेटिक पार्टिकल कहते हैं। ये लपटें बाहर निकलने की कोशिश करती हैं, लेकिन इनका चुंबकीय बंध इन्हें वापस खींच लेता है। कभी-कभी जहां पर सूर्य का तापमान अचानक से कम हो जाता है, वहां पर चुंबकीय बंध खुल जाता है और इलेक्ट्रो मैग्नेटिक पार्टिकल आगे चले जाते हैं। अगर ये पृथ्वी की दिशा में आगे निकले तो तीसरे दिन जाकर चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं।
उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर हरे रंग के ऑरोरा दिखाई देते हैं। सूर्य पर आग की लपटें जब कभी ज्यादा ताकतवर होती हैं तो पृथ्वी पर इलेक्ट्रिक उपकरणों को जलाकर राख कर सकती हैं। तीन दिन का समय लगने के कारण इसका पता पहले ही चल जाता है। इस कारण अमेरिका में पहले भी कई बार ब्लैक आउट हो चुका है। दुनिया भर के देश सूर्य की गतिविधियों पर निगाह रखते हैं। भारत का आदित्य एल-1 भी सूर्य पर निगाह रख रहा है।
दीपक शर्मा ने बताया कि एनएएस इंटर कॉलेज में बच्चों ने टेलीस्कॉप के जरिए सूरज पर धब्बे देखे। एक धब्बे का आकार इतना बड़ा है कि उसमें 100 पृथ्वी समा सकती हैं। सोमवार को एक लाइन में छह सन स्पॉट दिख रहे थे। इस अवसर पर प्रधानाचार्या आभा शर्मा, वीके ध्यानी, पुष्पेंद्र कुमार, चरण सिंह, मोहन लाल, सोनिया आदि उपस्थित रहे।