टिकट के बाद भितरघात का खतरा
मेरठ दक्षिण में टिकट की प्रतिस्पर्धा के बीच गुटबाजी और भितरघात की आशंका भी चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, बड़ी संख्या में दावेदार होना पार्टी की स्थानीय सक्रियता का संकेत हो सकता है, लेकिन टिकट से वंचित नेताओं और उनके समर्थकों की नाराजगी संगठन के लिए चुनौती बन सकती है।
यदि टिकट वितरण के बाद असंतोष बढ़ता है और समय रहते उसे दूर नहीं किया जाता, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के लिए उम्मीदवार चयन के साथ-साथ सभी दावेदारों और उनके समर्थकों को साथ लेकर चलना भी अहम होगा।
आदिल चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में
समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी का नाम मेरठ दक्षिण सीट से प्रमुख दावेदारों में शामिल है। वह पहले दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के सोमेंद्र सिंह तोमर को चुनौती दी थी और 7,942 मतों के अंतर से हार गए थे। उन्हें कुल 1,21,725 वोट मिले थे।
पिछले चुनाव में मिले मतों के आधार पर आदिल चौधरी की दावेदारी को मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को करना है। टिकट वितरण के बाद पार्टी अपने संभावित उम्मीदवार के पक्ष में संगठन को कितना एकजुट रख पाती है, यह भी मेरठ दक्षिण की चुनावी रणनीति का अहम पहलू होगा।