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Meerut: सॉल्वर गैंग का सरगना और उसका साथी गिरफ्तार, प्रादेशिक सेना की भर्ती में आए थे सेंधमारी करने

Sun, 07 Dec 2025 10:20 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

Solver Gang:पुलिस ने पीलीभीत के रिंकू और बुलंदशहर के कपिल को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर पहले भी रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। ये लोग परीक्षा पास कराने के नाम पर दो लाख रुपये तक लेते थे। 
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पकड़े गए दोनों आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेडिकल थाना क्षेत्र में पुलिस ने जागृति विहार के पास से सॉल्वर गैंग के सरगना पीलीभीत के पूरनपुर निवासी रिंकू व बुलंदशहर के सलेमपुर निवासी कपिल चौधरी को पकड़ लिया। आरोपियों के पास से पुलिस को एक तमंचा, चार कारतूस व एक कार बरामद हुई है। आरोपियों ने बताया कि वह प्रादेशिक सेना की भर्ती में सेंधमारी के लिए मेरठ आए थे। पूर्व में कई अन्य विभागों में सेंधमारी कर चुके हैं। आरोपी अभ्यर्थियों से परीक्षा में पास कराने व शारीरिक दक्षता के नाम पर 50 हजार से दो लाख रुपये तक लेते हैं।
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एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि रिंकू व कपिल चौधरी पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर सरकारी परीक्षाओं में पास कराने का ठेका लेते हैं। इसके लिए आरोपी संबंधित विभाग के कर्मचारियों से संपर्क कर उनसे अभ्यर्थियों की जानकारी ले लेते हैं। इस जानकारी के आधार पर उनसे संपर्क किया जाता है। डील होने पर आरोपी अभ्यर्थी की जगह पर अपने गैंग के सदस्यों को बैठाने, दौड़ व मेडिकल में पास कराने के नाम पर पैसे लेते हैं।
 

शनिवार को आरोपी कैंट क्षेत्र में चल रही प्रादेशिक सेना की भर्ती में सेंधमारी करने मेरठ आए थे लेकिन पुलिस को इसकी भनक लग गई थी। सुबह से ही पुलिस ने जागृति विहार के पास आरोपियों की घेराबंदी शुरू कर दी थी। इसी बीच पुलिस ने एक सफेद कार को रुकने का इशारा किया। पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे। पुलिस ने पीछाकर आरोपियों को पकड़ लिया। उनकी कार से एक तमंचा व चार कारतूस मिले।
 

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह सरकारी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने का ठेका लेते हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। आरोपियों पर पूर्व में भी प्राथमिकी दर्ज है। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि आरोपियों के गैंग के अन्य सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
 
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गैंग के सदस्य कर्मचारियों से करते हैं संपर्क
पुलिस पूछताछ में रिंकू व कपिल चौधरी ने बताया कि वह संबंधित विभाग की भर्ती के कर्मचारियों से एक महीने पहले से संपर्क करना शुरू कर देते हैं। कर्मचारियों को मोटा मुनाफा देने का लालच देते हैं। इसके आधार पर कर्मचारी अभ्यर्थियों की जानकारी गैंग के सदस्यों को देते हैं, फिर गैंग के सदस्य अभ्यर्थियों को अपना शिकार बनाते हैं।
 
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