सरधना विधानसभा सीट से सपा विधायक अतुल प्रधान ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोला है। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग को पत्र लिखकर मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय, सिविल लाइंस के क्षेत्राधिकारी अजय कुमार यादव, थाना प्रभारी सौरभ शुक्ला और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है।
विधायक का आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने जानबूझकर कलक्ट्रेट का मुख्य गेट बंद कर प्रदर्शनकारियों को बाहर ही रोक दिया। आरोप के मुताबिक एसएसपी सहित अन्य अधिकारियों ने अपने पद और पावर का दुरुपयोग करते हुए निहत्थे प्रदर्शनकारियों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, के साथ गाली-गलौज की और सार्वजनिक स्थान पर जातिसूचक शब्द कहकर उन्हें अपमानित किया।
पुलिस पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर थप्पड़ मारने और मारपीट करने का भी आरोप है। पत्र में कहा गया है कि पुलिस ने अपनी बर्बरता को छुपाने के लिए जनता को ही आरोपी बना दिया और खुद ही फर्जी रूप से घायल पुलिसकर्मी दिखाकर एफआईआर दर्ज कर ली।
आयोग से सख्त कार्रवाई और जांच दल गठित करने की मांग
अतुल प्रधान ने इसे मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन और पुलिस प्रशासन की दमनकारी नीति बताया है। उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग से आग्रह किया है कि वे इस घटना का संज्ञान लेते हुए मेरठ में एक विशेष जांच दल भेजकर मौके का सत्यापन कराएं और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराएं। साक्ष्य के तौर पर उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों की सीडी भी आयोग को भेजी है।
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