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Meerut: गृहकर पर नगर निगम में बखेड़ा, भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर भाजपा पार्षदों ने किया हंगामा

Tue, 23 Dec 2025 10:45 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

पार्षदों ने हंगामा करते कहा कि 15 गज के मकान पर भी आठ हजार रुपये तक गृहकर लगाया जा रहा है। मकानों पर दस से सौ गुना तक टैक्स बढ़ाया गया है। इसे लेकर रोष जताया गया।
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नगर निगम में हंगामा करते पार्षद और व्यापारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गृहकर के मामले पर सोमवार को नगर निगम में खूब बखेड़ा हुआ। संयुक्त व्यापार संघ और भाजपा पार्षदों ने निगम अफसरों पर भ्रष्टाचार को आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। व्यापारियों और पार्षदों ने बताया कि 15 गज के मामूली मकान पर आठ हजार, 1300 रुपये गृहकर जमा करने वाले को 68 हजार रुपये और 900 रुपये जमा करने वाले भवन स्वामी को 1.10 लाख का बिल थमाया जा रहा है।
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मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के कार्यालय में शोर-शराबा सुनकर वहां मौजूद 100 से अधिक भवन स्वामी भी अंदर घुस आए और निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए सीधे आरोप लगाया कि 10-10 हजार रुपये लेकर गृहकर के बिल कम किए जा रहे हैं। करीब दो घंटे तक यह हाई-वोल्टेज हंगामा चला लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।
 

जीआईएस सर्वे के आधार पर शहर में 4.49 लाख भवन चिह्नित हुए थे। नगर निगम द्वारा भौतिक सत्यापन के दौरान चिह्नित करीब एक लाख भवन में प्लाॅट या फिर भवन ही नहीं मिले। निगम ने करीब 3.50 भवन से गृहकर की वसूली करने की योजना बनाकर बिल वितरित करा दिए थे। इसमें भवन स्वामियों पर कई गुना बढ़ाकर बिल पहुंचे। निगम ने 31 दिसंबर तक छूट देने और उसके बाद नए बिल के हिसाब से वसूली करने की चेतावनी दे दी। इस पर भवन स्वामियों में बेचैनी हो गई। गृहकर के बढ़े बिल को लेकर निगम की बोर्ड बैठक से लेकर निगम परिसर में अक्सर विवाद हो रहे हैं। सोमवार को संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता, भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ, पवन चौधरी, संजय सैनी सहित अन्य कई पार्षद नगर निगम में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए।
 

पार्षदों के पास 50 से अधिक गृहकर बिल थे, इसमें दस गुना से लेकर 100 गुना तक बिलों को बढ़ाया हुआ था। पार्षद पवन चौधरी ने शास्त्रीनगर जोन में राजकली नाम की महिला के गृहकर का बिल मुख्य कर निर्धारण अधिकारी को सौंप दिया। चौधरी ने बताया कि राजकली का मकान 15 गज में बना हुआ है इस पर 8400 रुपये का गृहकर किस नियम से लगा हैं। पार्षद अनुज वशिष्ठ ने अपने वार्ड के दो बिल दिए। एक में 1300 रुपये की जगह 68 हजार और दूसरे में 900 रुपये की जगह 1.10 लाख का गृहकर दिया गया है। पार्षदों ने हंगामा करना शुरू किया तो कार्यालय के बाहर खड़े 100 से अधिक लोग वहां पर पहुंच गए। उन्होंने भी कहा कि गृहकर के नाम पर निगम में लूट मच रही है।
 

बंदूक के बल पर लेना चाहते मनमाना गृहकर
परतापुर अछरौंडा से आए हरिकिशन ने बताया कि वे एक सप्ताह से रोजाना निगम में चक्कर काट रहे हैं। 10 हजार की रिश्वत कर्मचारी को देकर एक गृहकर बिल कम कराया है। यह सुनकर भाजपा पार्षद भड़क गए। पार्षदों ने कहा कि गृहकर के नाम पर भवन स्वामियों को लूटा जा रहा हैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। बंदूक के बल पर मनमानी तरीके से गृहकर लेने की निगम की योजना नहीं चलेगी। भवन स्वामियों को जहर देने का काम निगम कर रहा हैं इससे पार्टी की छवि भी धूमिल हो रही हैं।
 

30 वर्गमीटर से छोटे घर पर नहीं लगता टैक्स
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि निगम बताए कि 30 वर्गमीटर वाले भवन कितने चिह्नित किए। निगम की नियमावली में 30 वर्गमीटर के भवन पर टैक्स नहीं लगता। बशर्ते भवन स्वामी का वह एकमात्र भवन होना चाहिए। 30 साल पुराने भवन पर 40 प्रतिशत की छूट है इसमें निगम सिर्फ 25 प्रतिशत छूट क्यों दे रहा हैं। 15 गज के मकान पर गृहकर कैसे लगा दिया। पार्षदों और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी की तीखी बहस भी हुई।
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स्वकर प्रपत्र पर हस्ताक्षर करा रहे निगम अफसर
बढ़े गृहकर पर आपत्ति करने वाले भवन स्वामियों को नगर निगम द्वारा स्वकर निर्धारण प्रपत्र दिया जा रहा है। स्वकर प्रपत्र को भरा नहीं जाता और भवन स्वामी से सिर्फ हस्ताक्षर कराए जाते हैं। स्वकर प्रपत्र पर न तारीख है और न उसकी किसी को जानकारी है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी का कहना है कि स्वकर प्रपत्र के बारे में कर्मचारियों को तीन दिन प्रशिक्षण दिया गया हैं। गृहकर पर आने वाली आपत्ति का निर्धारण कराया जा रहा है।

 
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