शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर है। विधानसभा में सपा विधायक अतुल प्रधान द्वारा उठाए गए दुकानों के ध्वस्तीकरण के मुद्दे पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है। संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए क्षेत्र का लैंड यूज (भू-उपयोग) बदलने जा रही है।
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश ध्वस्तीकरण का है लेकिन व्यापारियों के रोजगार और जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार जमीन का लैंड यूज बदलने जा रही है। हालांकि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कुल प्रभावित भूखंडों में से 120 भूखंड ऐसे हैं, जिनका लैंड यूज तकनीकी कारणों से नहीं बदला जा सकेगा। सदन में चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री ने इस विवाद की पूरी टाइमलाइन पेश की।
उन्होंने कहा कि 1986 में कांग्रेस सरकार के दौरान भूखंडों का आवंटन हुआ। 1989 में मुलायम सिंह यादव सरकार में आवंटियों को कब्जा दिया गया। कब्जे के एक साल के भीतर ही रिहायशी भूखंडों पर बिना अनुमति व्यावसायिक दुकानें बन गईं। आवास विभाग लगातार नोटिस देता रहा लेकिन निर्माण नहीं रुके।
2005 में उच्च न्यायालय ने दुकानें गिराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया, जिसका पालन नहीं हुआ। इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। सर्वोच्च न्यायलय ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। बीती 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश का पूर्णत पालन न होने पर सख्त टिप्पणी भी की थी।
अतुल प्रधान ने पुरजोर तरीके से रखा पक्ष
इससे पहले सपा विधायक अतुल प्रधान ने बुधवार को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान सेंट्रल मार्केट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 1400 दुकानों पर बुल्डोजर का संकट मंडरा रहा है। इससे लगभग एक लाख की आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में अधिकारियों के साथ बैठक में इसे बाजार स्ट्रीट का दर्जा देने की बात तय हुई थी लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ। विधायक ने मांग की कि व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार तत्काल ठोस कदम उठाए।
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