राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर।
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विकास भवन सभागार में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की जनसुनवाई के दौरान बृहस्पतिवार को बिजली गुल हो गई। मोबाइल की टॉर्च में फरियादियों की शिकायतें पढ़ी गईं। सभागार में एसी भी काम नहीं कर रहा था। गर्मी में अध्यक्ष और अन्य अधिकारी पसीना पोछते रहे। जेनरेटर चलाने की बात पर जवाब मिला कि कुल 10 लीटर ही डीजल है। तमाम कोशिशों के बाद भी जेनरेटर नहीं चलाया जा सका।
बृहस्पतिवार को आपके द्वार जनसुनवाई में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कुल 65 पीड़ित महिलाओं की शिकायतें सुनीं। इस दौरान घरेलू हिंसा, दहेज, हत्या और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले भी सामने आए। लैंगिक हिंसा, अपहरण, छेड़छाड़ और पुलिस संबंधित शिकायतें भी सुनी गईं। विजया रहाटकर ने सभी शिकायतों का एक सप्ताह में निस्तारण करने का अफसरों को निर्देश दिया।
जनसुनवाई के बाद विजया रहाटकर ने अधिकारियों संग बैठक की। इसमें सुकन्या समृद्धि और प्रधानमंत्री आवास योजना पर चर्चा हुई। मनरेगा, एनआरएलएम व महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना की भी समीक्षा हुई। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की प्रगति की भी जानकारी ली गई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान, सदस्य मीनाक्षी भराला राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन और उप निदेशक रामावतार सिंह के अलावा डीएम डॉ. वीके सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल, एसपी देहात अभिजीत कुमार भी मौजूद थे।
आयोग की सदस्यों की नहीं सुनते अधिकारी
महिला उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निस्तारण पर आयोग की सदस्यों के दिशा-निर्देश अधिकारी नहीं सुनते। बृहस्पतिवार को महिला आयोग की अध्यक्ष के पास जितनी शिकायतें पहुंचीं , उनमें से अधिकांश महिला आयोग की सदस्यों के पास पहले भी आ चुकी थीं। सदस्यों की ओर से शिकायतों का निस्तारण न कराने पर सवाल भी उठते रहे हैं। सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला का कहना है कि जनसुनवाई में आई शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है, लेकिन कुछ नहीं होता।
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