जैसे कयास लगाए जा रहे थे, वैसा ही हुआ। बसपा आला कमान ने सरधना से उम्मीदवार घोषित किए गए संजीव धामा का न केवल टिकट काटा, बल्कि पार्टी से भी निष्कासित कर दिया। अब पार्टी इस सीट पर किसी कद्दावर मुस्लिम उम्मीदवार की तलाश कर रही है। ऐसा न होने पर टिकट सतेंद्र सोलंकी को दिया जाना तय है।
चुनावी रण से पहले बसपा ने अपने सूरमाओं में फेरबदल शुरू कर दिया है। 13 फरवरी के अंक में अमर उजाला ने संभावना जाहिर कर दी थी कि सरधना को लेकर पेंच फंसा है और यहां से घोषित उम्मीदवार का टिकट काटा जा सकता है। वही हुआ। शुक्रवार को बसपा आला कमान ने सरधना से उम्मीदवार संजीव धामा को पार्टी से निष्कासित कर दिया। आरोप लगाया है पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का। इस बाबत जिलाध्यक्ष अश्वनी जाटव की ओर से विज्ञप्ति भी जारी कर दी गई है।
दरअसल दस दिन पूर्व लखनऊ में हुई कोऑर्डिनेटरों की बैठक में कई सीटों पर मंथन हुआ। उसमें सरधना सीट भी शुमार थी। पार्टी आला कमान यहां किसी कद्दावर मुस्लिम को लड़ाने के चक्कर में है। हालांकि जिन पर दांव लगाने की कोशिश की जा रही है, वे यहां से लड़ने के इच्छुक नहीं हैं।
सतेंद्र सोलंकी होंगे उम्मीदवार?
बसपा बरनावा से पूर्व विधायक सतेंद्र सोलंकी पर सरधना से दांव खेल सकती है। बताया जा रहा है कि संजीव को हटाने के बाद उनकी दावेदारी फाइनल कर दी गई है। बस घोषणा शेष है। दरअसल मुस्लिम के अलावा यहां पार्टी जाट-दलित समीकरण को बेहतर विकल्प मानकर चल रही है। मगर सतेंद्र सोलंकी मेरठ कैंट सीट से दावेदारी जता रहे हैं। हालांकि पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी को पार्टी बेहतर उम्मीदवार मान रही है, पर वे वहां जाने को तैयार नहीं हैं। पूर्व सांसद शाहिद अखलाक की बसपा में वापसी का आधार भी यही सीट है। बताया जा रहा है कि शाहिद को कहा जा रहा है कि वे वहां से अपने परिवार के किसी सदस्य को लड़ाएं।
कैंट सीट पर शैलेंद्र को भी खतरा
सरधना के बाद मेरठ की कैंट सीट पर पार्टी की तिरछी नजर है। आलाकमान मानकर चल रहा है कि यहां पार्टी उम्मीदवार की तैयारियां मुकम्मल नहीं हैं। शैलेंद्र चौधरी को पार्टी ने यहां से उम्मीदवार घोषित कर रखा है। दो दिन पूर्व बसपा सुप्रीमो ने उन्हें इस बाबत बात करने बुलाया था, पर वे लखनऊ नहीं पहुंच सके। बताया गया कि रास्ते में दुर्घटना होने के कारण उन्हें चोट लगी और वे अस्पताल में भर्ती हैं। तबीयत खराब होेने की बात भी कही गई। इस पर जिलाध्यक्ष अश्वनी कुमार को बुलाकर नाराजगी जताई गई और कहा गया कि अगली तारीख मुकर्रर कर उन्हें बुलाओ। अभी तक शैलेंद्र वहां नहीं गए और न ही फोन पर पार्टी पदाधिकारियों से वार्ता की। चर्चा है कि संजीव के साथ उन्हें भी इंकार करने का मन बना लिया है।