राष्ट्रीय सनस्क्रीन दिवस:
मेडिकल कॉलेज में बढ़ रही त्वचा रोगियों की संख्या
पराबैंगनी किरणें बढ़ा रहीं कैंसर का खतरा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ।
भीषण गर्मी और लू के कारण त्वचा रोगियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। लाला लाजपतराय मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभाग की ओपीडी में इन दिनों मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। गर्मी और उमस के चलते दाद, खाज, खुजली और सनबर्न जैसी चर्म बीमारियों के मरीज सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। बुधवार को राष्ट्रीय सनस्क्रीन दिवस के मौके पर डॉक्टरों ने मरीजों को धूप से बचाव और सही सनस्क्रीन के इस्तेमाल की सलाह दी।
मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में त्वचा रोगियों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सूरज की हानिकारक पराबैंगनी (यूवी-ए और यूवी-बी) किरणें न सिर्फ त्वचा को काला (टैन) करती हैं बल्कि सनबर्न और स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती हैं।
क्या है सनबर्न?
धूप में ज्यादा देर रहने से त्वचा जल जाती है जिससे त्वचा लाल होना, जलन, दर्द और छाले पड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सनस्क्रीन क्रीम त्वचा पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो समय से पहले आने वाली झुर्रियों और बुढ़ापे को भी रोकती है।
सही सनस्क्रीन का चुनाव और इस्तेमाल
चिकित्सकों के अनुसार धूप के नुकसान से बचने के लिए सही सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। ऐसी क्रीम का चुनाव करें जो यूवी-ए और यूवी-बी, दोनों हानिकारक किरणों से सुरक्षा दे। धूप में निकलने से कम से कम 15 से 20 मिनट पहले चेहरे और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन जरूर लगाएं।
सनबर्न से राहत के घरेलू व प्राकृतिक उपाय
चिकित्सकों के मुताबिक हल्के सनबर्न से राहत के लिए एलोवेरा जेल का प्रयोग करें। यह लालिमा, सूजन और परेशानी को कम करने में मदद करता है। नारियल का तेल धूप से झुलसी त्वचा को हाइड्रेट और आराम पहुंचाता है। खीरे के ठंडे टुकड़े भी धूप से झुलसी त्वचा को आराम देते हैं। इसके अलावा दलिया स्नान सनबर्न से जुड़ी खुजली और जलन से राहत दिलाता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन त्वचा को सूरज के नुकसान से बचाता है। जामुन, खट्टे फल, पत्तेदार साग और मेवे आहार में शामिल करें।