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विश्व रेडियो दिवस पर विशेष: मंद होती आवाज को 'मन की बात' ने दी संजीवनी

Sat, 13 Feb 2021 02:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा एजाज अहमद, नजीबाबाद (बिजनौर)। 
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मन की बात... - फोटो : Amar Ujala Graphics
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सूचना, मनोरंजन और ज्ञानपरक प्रसारण से रेडियो दशकों से श्रोताओं के दिलों पर राज करता आया है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के साथ इंटरनेट के युग में रेडियो की मंद होती आवाज को प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को प्रसारित होने वाले प्रधानमंत्री के मन की बात ने संजीवनी देने का काम किया है।  

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आजादी के आंदोलन में सूचनाओं के नजरिए से रेडियो की खास भूमिका रही। 15 अगस्त 1947 को देश में आजादी की सार्वजनिक रूप से घोषणा पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियो से की। आजादी से पूर्व महात्मा गांधी ने वर्ष 1930 में रेडियो के माध्यम से ही सत्य और अहिंसा का ज्ञान बांटा। सात दशक पूर्व मनोरंजन का साधन सिर्फ रेडियो था। रेडियो की मधुर धुन और ये आकाशवाणी है से ही लोगों के दिन की शुरुआत होती थी। आकाश में तैरती तरंगों के जरिए रेडियो की सिग्नेचर ट्यून और वंदेमातरम के साथ समाचार, भूले बिसरे गीत फिजाओं में गूंजते थे। रेडियो ही लोगों के मनोरंजन, सूचना और शिक्षा का साधन था। अमीन सयानी की सीलोन रेडियो की गीतमाला हो, सैनिकों का पसंदीदा कार्यक्रम जयमाला हो, साहित्य और ज्ञान-मनोरंजन के उद्घोषकों की मधुर आवाज में प्रस्तुत प्रसारण सभी श्रोताओं के दिलों की धड़कन हुआ करते थे। 

रेडियो के समाचारों की लोकप्रियता में विनोद कश्यप, देवकी नंदन पांडेय, अशोक वाजपेयी, इंदुवाही, रामानुज प्रसाद सिंह, अजीज हसन सरीखे समाचार वाचक मील का पत्थर साबित हुए। बीबीसी प्रसारण सेवा ने भी रेडियो की लोकप्रियता के साथ करीब सात दशक तक उच्च गुणवत्ता के प्रसारणों से नवाजा। 31 मार्च 2011 को बीबीसी हिंदी प्रसारण सेवा बंद हुई। 80 के दशक में दूरदर्शन की शुरुआत और अब केबल टीवी के दौर में भी आकाशवाणी ने अपनी पहचान को कायम रखा है। एफएम रेडियो ने भी रेडियो लोकप्रिय को चमक दी।
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भारत में रेडियो की कहानी
भारत में रेडियो प्रसारण की शुरुआत मुंबई और कोलकाता में वर्ष 1927 में हुई। दो निजी स्वामित्व वाले ट्रांसमीटरों से प्रसारण सेवा शुरू हुई। पूर्व में मुंबई के रेडियो क्लब द्वारा 1923 में पहला कार्यक्रम प्रसारित किया गया। मुंबई और कोलकाता की निजी ट्रांसमीटरों को 1930 में सरकार ने अपने नियंत्रण में ले लिया। नाम भारतीय प्रसारण सेवा यानी इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन रखा गया। 1936 में ऑल इंडिया रेडियो नाम पड़ा और 1957 से वर्तमान में प्रचलित आकाशवाणी नाम दिया गया।

पीएम की मन की बात ने रेडियो को उबारा
14 अक्तूबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आकाशवाणी से मन की बात का प्रसारण शुरू किया। प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को मन की बात में प्रधानमंत्री ने युवाओं और देशवासियों को राष्ट्रप्रेम, एकता, अखंडता से जोड़ने, विकास और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र के बिंदुओं पर सारगर्भित विचारों से जहां देशवासियों को समरसता का संदेश और ऊर्जा देते हैं वहीं रेडियो के बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय.. उद्घोष को साकार करने के साथ रेडियो प्रसारण को इलेक्ट्रोनिक चैनलों की प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने के लिए सेतु का काम किया। 

भारतीयता में समायी सिग्नेचर ट्यून
आकाशवाणी की मधुर और कर्णप्रिय राग शिवरंजनी पर आधारित सिग्नेटर ट्यून यहूदी संगीतकार वाल्टर काफमैन ने बनाई। हर सुबह आकाशवाणी प्रसारण शुरू होते समय बजने वाली सिग्नेचर ट्यून यानी संकेत ध्वनी रेडियो पर पहली बार 8 जून 1936 को आई। सिग्नेचर ट्यून से ठाकुर बलवंत सिंह का नाम भी जुड़ा। वाल्टर काफमैन भले ही विदेशी थे लेकिन सिग्नेचर ट्यून की दिव्यता और भारतीयता पर कभी उंगली नहीं उठी।

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