रेलवे के फर्जी ‘भर्ती बोर्ड’ का जाल देशभर में फैला हुआ है। जालसाज कोलकाता में ज्वाइनिंग कराकर युवकों को दिल्ली, बिहार समेत हिंदुस्तान के बडे़ शहरों में ट्रेनिंग कराते हैं।
इस जाल में अब तक 28 से अधिक शिक्षित युवकों के शिकार होने की बात सामने आई है। बुधवार को पांच जालसाजों के खिलाफ रेलवे रोड थाने में मुकदमा पंजीकृत हो गया।
आर्मी में सूबेदार पद से रिटायर मनोज कुमार निवासी 87/6 ओल्ड जमुनिया मोहल्ला कैंट की शिकायत पर बुधवार को आरोपी कुर्बान, शिव शंभू, अरुण रजौरिया, वरुण सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ रेलवे रोड थाने में केस दर्ज हुआ। रिपोर्ट में मनोज कुमार के बेटे चंदन और उसके रिश्तेदार सुमित, पंकज, धीरेंद्र और दीनदयाल समेत करीब 28 युवकों से करीब दो करोड़ रुपये ठगने का जिक्र है।
इस गिरोह में 40 से अधिक लोगों के नाम अभी तक सामने आए हैं। पुलिस ने दो टीमें बनाकर उनकी तलाश शुरू कर दी है।
कैसे हुआ था भंडाफोड़
मंगलवार को रिटायर सूबेदार मनोज कुमार ने एसएसपी डीसी दूबे को शिकायत पत्र दिया था। मनोज ने बताया कि 18 दिसंबर 2014 को बेटे चंदन की रेलवे में हेल्पर की नौकरी लगवाने के नाम पर 4.50 लाख रुपये पड़ोसी फौजी मोमिन के रिश्तेदार कुर्बान निवासी रामपुर मनिहार सहारनपुर को दिए थे।
दस माह कोलकाता के हावड़ा रेलवे स्टेशन पर चंदन ने ट्रेनिंग भी की। इस दौरान उनके रिश्तेदारों ने भी कुर्बान को अपने-अपने बेटों की रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर प्रति भर्ती 6.50 लाख रुपये दिए थे। दस महीने तक वेतन न मिलने पर छानबीन की गई, तो फर्जी बोर्ड का भंडाफोड़ हुआ था।
नियुक्ति पत्र भी असली!
पीड़ित युवकों को जो नियुक्ति पत्र दिया गया था, पुलिस ने बुधवार को उसकी सिटी स्टेशन पर जाकर जांच कराई, तो वह असली बताया गया। लेकिन पुलिस ने जब रेलवे अधिकारियों को सारे कागजात दिखाए, तो वे भी हैरान रह गए। नियुक्ति पत्र जालसाजों को कहां से मिलता है, इसकी जांच रेलवे भी अपनी तरफ से करने में जुट गया है।
वर्जन
रिटायर सूबेदार की शिकायत पर रेलवे रोड थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। इस गिरोह की तलाश में पुलिस की दो टीमें बनी हैं। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
- डीसी दुबे, एसएसपी मेरठ