जिमखाना मैदान सोमवार को बदला-बदला सा दिखा। एक हजार से अधिक लोगों से भरे मैदान में चारों ओर जोश और उत्साह दिखाई दिया। हर चेहरे पर खुशी झलक रही थी।
पतंगबाजी के साथ लोग कठपुतली के डांस और भंगड़ा का आनंद ले रहे थे। युवा जोश के साथ अपने साथियों का उत्साह बढ़ा रहे थे। आसमान में पतंगें बल खा रही थीं। यह नजारा मेरठ पतंग महोत्सव 2016 में दिखाई दिया।
अमर उजाला के सहयोग और ‘ मेरा शहर, मेरी पहल’ की ओर से सोमवार को पतंग महोत्सव शुरू हुआ। शुभारंभ एडीएम सिटी एसके दूबे, पर्यटन अधिकारी अमित श्रीवास्तव, व्यापारी बिजेंद्र अग्रवाल, वरुण अग्रवाल, नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन, अमित कुमार अग्रवाल, मुकुल गुप्ता ने किया।
पंजाब से आए कलाकारों ने भंगड़ा की प्रस्तुति दी। शहर के प्रसिद्ध पतंगबाज चाचा कल्लू और श्याम लाल के बीच पेच हुआ। इसी बीच राजस्थान का कठपुतली नृत्य ‘ अनारकली’ की प्रस्तुति दी गई। मैदान में टैटू स्टाल, पॉटरी स्टाल, काइट शॉप और रिफ्रेशमेंट स्टाल पर सुबह से शाम पर युवाओं की भीड़ रही।
एनसीसी कैडेट भी पूरे कार्यक्रम में व्यवस्था में लगे रहे। कार्यक्रम में पहुंचे 500 से अधिक लोगों ने मेरा शहर, मेरी पहल’ का रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा।
इस तरह होगी प्रतियोगिता
प्रतियोगिता में 512 प्रतिभागी भाग लेंगे। चार दिन में प्रतिदिन 128 प्रतिभागियों के बीच मैच होंगे। अगले राउंड के लिए 64 खिलाड़ियों का चयन होगा, जो फिर आगे चलकर विभिन्न दिनों में क्वार्टर फाइनल, सेमीफाइनल और फाइनल मैच खेलेंगे।
प्रतियोगिता में पहले राउंड में विशाल कुमार, वसीम, मोहम्मद फुरकान, नाजिश, शादाब, सोमेश जैन, आकाश, शैरोज के बीच प्रतियोगिता हुई। विशाल कुमार और वसीम ने अपने पाले से पतंग उड़ाई।
वसीम ने टास जीता और वसीम को पेच भिड़ाने का मौका दिया गया। वसीम ने खींच से पेच काटा और अगले राउंड में प्रवेश किया। देर शाम तक विभिन्न प्रतिभागियों के बीच मुकाबले हुए।
ये है नियम
दो प्रतिभागियों के बीच होती है प्रतियोगिता
अपने सर्कल से उड़ाते हैं पतंग, बाहर नहीं जा सकते प्रतिभागी।
टॉस जीतने वाला पतंगबाज प्रतिद्वंद्वी की पतंग पर करता है हमला।
भंगड़ा देखने को उमड़े लोग
दिल्ली के शिव ग्रुप इवेंट के कलाकारों ने कार्यक्रम में अपनी मनमोहक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। पंजाबी गीतों पर पंजाब के कलाकारों ने भंगड़ा की प्रस्तुति दी। बॉलीवुड और पंजाबी रिमिक्स पर युवा झूमते नजर आए। कार्यक्रम में राजस्थानी अनारकली भी आकर्षण का केंद्र रही।
राजस्थान से कलाकार ने कठपुतली राजस्थान के पारंपरिक लोक गीतों पर नृत्य कराया। प्रदेश की संस्कृति को गीतों के माध्यम से समझाने का प्रयास किया।
काइट शाप पर रही भीड़
प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही पतंग की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। बच्चे और युवा सभी ने डिजाइनर पतंगें खरीदी और पेच लड़ाए। बरेली का मांझा मुख्य रूप से युवाओं का पसंदीदा रहा। प्रतियोगिता में ज्यादातर प्लेन पतंगों का इस्तेमाल किया गया।
पॉटरी और टैटू ने दिल को छुआ
काइट फेस्टिवल में पॉटरी प्रदर्शनी और टैटू मेकिंग युवाओं सहित आमंत्रित लोगों के दिलों को छूू गई। पॉटरी मेकर हरि कृष्ण ने प्रदर्शनी में छोटी पतंगों से सजी गुल्लक, सुराही और फ्लावर पाट बनाए। दूसरी तरफ दिल्ली से आए टैटू मेकर सोनू ने बच्चों के मुंह और हाथ पर पतंगों के टैटू बनाए, जो मुख्य रूप से आकर्षण का केंद्र रहे।
हाईटेक हुई पतंगबाजी
क्रिकेट में जहां बैट, टी-शर्ट को लकी मानते हैं उसी प्रकार पतंगबाज चर्खी और पतंग को लकी मानते हैं। प्रतियोगिता में वह उन्हीं चर्खी और पतंगों का प्रयोग करते हैं। समय के बदलाव के साथ पतंगबाजी भी हाईटेक हो गई है। विशेष प्रकार के किट बैग स्टाइल के बैग में पतंगें और मांझे की चर्खी रखी जाती है। एक अच्छे पतंगबाज के पास कई हजार का सामान होता है।
कायम है गुुरु चेला परंपरा
हर खेल की भांति पतंगबाजों का भी अपना एक सर्कल होता है। हर पतंगबाज गुरु चेला परंपरा का पालन करता है। हर कोई पतंग उड़ाने का इच्छुक युवक किसी को अपना गुरु बनाता है, तो गुरु दक्षिणा पहली दी जाती है।
उस्ताद महमूद अहमद के अनुसार शिष्य अपने हैसियत के अनुसार गुरु को उसकी आवश्यकता का सामान भेंट करता है, साथ ही बिरादरी में शामिल होने पर पार्टी का आयोजन किया जाता है।