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होते रहे वक्फ जमीन पर कब्जे, सोता रहा सिस्टम

Sat, 06 Feb 2016 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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वक्फ की जमीन पर बनी लिकर किंग विजय माल्या की शराब फैक्ट्री को अवैध बताते हुए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कड़ा रवैया अपनाया है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब वक्फ की जमीन पर कब्जे का मामला सामने हो। लेकिन सिस्टम इतना सुस्त रहा कि कभी इन्हें कब्जा मुक्त कराने का प्रयास तक नहीं हुआ।
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सरधना रोड पर हाईवे से सटी बीस करोड़ से ज्यादा रुपये की वक्फ बोर्ड की लगभग बीस बीघा जमीन भू माफियाओं ने न केवल बेच डाली बल्कि इस पर कब्जे भी करा दिए। गांव नंगलाताशी कासमपुर क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर ही शिया वक्फ बोर्ड की संपत्ति पर भू माफियाओं ने जमकर प्लॉटिंग की।

सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ बोर्ड एसएन पांडे का कहना है कि तहसील टीम के साथ तत्काल मौके पर जाकर देखा गया तो पाया कि बोर्ड की संपत्ति संख्या 2361 पर माफियाओं ने कब्जा कर लिया। विद्युत खंभे तक लगा डाले। इस प्रकरण में आरोपियों पर मुकदमे भी कराए गए।
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हैरान करने वाली बात यह रही कि जब यहां फिर से पैमाइश कराई गई तो गजब हो गया। यह कुल संपत्ति 3.3 हेक्टेयर है जबकि मौके पर पाई गई मात्र 1.6 हेक्टेयर। यानी बाकी संपत्ति बेच डाली गई। उस पर प्लॉटिंग करने के अलावा मकान बने हैं। यहां भी कथित मुतवल्ली ने खेल किया।

माल्या पर मुकदमे से बढ़ी सरगर्मी
अब विजय माल्या की वक्फ की जमीन पर शराब फैक्ट्री चलने और मुकदमे के आदेश होने का मामला सामने आने पर सरगर्मी अचानक बढ़ गई है। इस बाबत वक्फ की अन्य संपत्तियों का भी रिकॉर्ड तलाशा जाने लगा है। बता दें कि यूनाइटेड स्प्रिट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक विजय माल्या की कासमपुर कंकरखेड़ा में लगभग दस बीघा में शराब की फैक्ट्री है।

जिसको लेकर अब शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कहा गया है यह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और इस पर अवैध रूप से फैक्ट्री बनाई गई है। बोर्ड चेयरमैन ने इसे हटाने और विजय माल्या समेत कंपनी के अन्य सभी बोर्ड डायरेक्टरों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश बृहस्पतिवार को मेरठ के डीएम और एसएसपी को दिए हैं। हालांकि शुक्रवार को स्थानीय जिला प्रशासन के अफसरों ने इस संबंध में आदेश नहीं मिलने की बात कही।

लेकिन खंगाले गए दस्तावेज
महकमे में इस मामले के पूरे दस्तावेज खंगाले गए हैं। सामने आया है कि इस प्रकरण में हुई शिकायत पर वक्फ के इंस्पेक्टर सैयद वजीर ने जांच करते हुए 14 जनवरी 2016 को रिपोर्ट सौंपी थी। जिस पर 22 जनवरी 2016 को निर्णय लेेते हुए उसी दिन एसओ कंकरखेड़ा को पत्र जारी कर दिया गया था। वक्फ अधिकारी इस संबंध में आला पुलिस अधिकारियों से भी मिले थे।

कई पेंच भी हैं फंसे
इस मामले में भले ही निर्णय सख्त हुआ हो पर अभी कई पेंच फंसे हैं। दस्तावेजों के अध्ययन के मुताबिक वर्ष 1918 में यह सैयद मोहम्मद की जमीन वक्फ की हुई। 20 अप्रैल 1937 को इस दस बीघा जमीन को सेंट्रल डिस्टलरी एंड केमिकल वर्क्स को पचास साल के लिए लीज पर देने की बात कही जा रही है। दावा है कि 29 मार्च 1965 को सैयद मोहम्मद के परिवार के लोगों ने बिना अधिकार के इस जमीन का बैनामा किया। उसी कंपनी को जिसे इसे लीज पर दे रखा था। खरीददार को यह देखना चाहिए था कि यह जमीन वक्फ की है या नहीं।

कंपनी लॉ बोर्ड के मुताबिक सात बार इस कंपनी का नाम बदला और फिलहाल इसका नाम यूनाइटेड स्प्रिट्स प्राइवेट लिमिटेड है। बताया जा रहा है कि प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों ने इस प्रकरण की जांच नहीं की। वक्फ बोर्ड निरीक्षक की जांच पर ही पूरी कार्रवाई हुई। दूसरा इतना लंबा समय होने पर पहले इस बाबत कोई गंभीरता नहीं दिखाई दी। चाहे जो हो पर फिलहाल तो यह कंपनी बुरी तरह से यहां इस प्रकरण में फंसी हैं।
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