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अवैध कब्जों का खुलासा हुआ तो जागा निगम प्रशासन

Sun, 31 Jan 2016 02:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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नगर निगम सीमा में सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों का मामला उजागर होने के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया। संपत्ति अधिकारी ने निगम के लेखपालों से मौके पर सरकारी भूमि का सत्यापन करने और स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
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साथ ही निगम सीमा में सरकारी भूमि का स्वामित्व जिला प्रशासन का होना बताया है। कहा निगम प्रशासन की शहर में तालाब, बंजर सरकारी भूमि पर केवल रखरखाव की जिम्मेदारी है।

अमर उजाला ने शहर में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों का समाचार शनिवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद निगम के लेखपाल दिन भर भूमि का रिकॉर्ड खंगालने में जुटे रहे। अब नगर निगम प्रशासन ने शहर में पड़ी सरकारी भूमि, जिनमें तालाब और बंजर भूमि भी शामिल हैं।
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सभी पर जिला प्रशासन का स्वामित्व बताना शुरू कर दिया है। यानी शहर में घेरी जा रही सरकारी भूमि नगर निगम और जिला प्रशासन में फुटबॉल बनी है। दोनों ही विभाग एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

अगर नगर निगम संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार की मानें तो 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी विकास गोठवाल के आदेशानुसार नगर निगम क्षेत्र में आने वाली ग्राम समाज और राजकीय संपत्ति पर जिला प्रशासन का स्वामित्व होगा। केवल नगर निगम और नगर निकाय के अधिकारी प्रबंधन करेंगे।

इतना जरूर है कि अगर कहीं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की सूचना मिलती है तो मौके पर निरीक्षण करके इसकी सूचना जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी और तहसीलदार को दी जाएगी। जो समय समय पर कराया जाता रहा है।

सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटवाने के लिए मांगे जाने पर निगम प्रशासन मशीनरी उपलब्ध कराएगा, लेकिन संपत्ति अधिकारी के बयानों से नया सवाल भी खड़ा हो गया है। जब नगर निगम सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं है तो संपत्ति अधिकारी ने लेखपालों से स्पष्टीकरण किस आधार पर मांगा है।
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