सीसीएसयू के छात्रसंघ अध्यक्ष सचिन चौधरी का एडमिशन प्रवेश समिति ने रद्द कर दिया है। छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के 10 दिन बाद ही अध्यक्ष की कुर्सी चली गई। आधिकारिक रूप से वह एक भी दिन अपनी कुर्सी पर नहीं बैठ पाए। प्रवेश समिति ने अमान्य बोर्ड द्वारा 12वीं करने के मामले में यह कार्रवाई की है।
साथ ही विभाग के समन्वयक को पद से कार्यमुक्त कर दिया गया है। सचिन का एडमिशन रद्द होने के साथ ही वह छात्रसंघ अध्यक्ष भी नहीं रहे। एनएसयूआई और रालोद छात्रसभा के लिए यह बड़ा झटका है। कार्रवाई के बाद हंगामा और टकराव के आसार हैं। विवि के इतिहास में छात्रसंघ अध्यक्ष के हटने का यह पहला मामला है।
21 नवंबर को विवि में छात्रसंघ चुनाव हुआ था। एनएसयूआई और रालोद छात्रसभा के संयुक्त प्रत्याशी सचिन चौधरी अध्यक्ष चुने गए थे। सचिन ने लॉ डिपार्टमेंट में बीए एलएलबी में एडमिशन लिया था।
जीत के एक दिन बाद ही समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष राजदीप विकल के नेतृत्व में छात्रसभा की ओर से सचिन का एडमिशन फर्जी होने की शिकायत की गई थी। इस पर विवि ने जांच बैठा दी थी। कमेटी की जांच के बाद प्रवेश समिति और ग्रीवेंस सेल की बैठक हुई।
इसके बाद विभाग को गहन जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, एडमिशन रद्द करने की संस्तुति की गई थी। विभाग के समन्वयक डॉ. केके मित्तल ने कुलपति को एडमिशन रद्द करने की रिपोर्ट भेज दी। मंगलवार शाम को प्रतिकुलपति प्रो. एचएस सिंह की अध्यक्षता में प्रवेश समिति की फिर बैठक हुई।
विवि के सहायक प्रेस प्रवक्ता डॉ. प्रशांत कुमार के मुताबिक, समिति ने सचिन का एडमिशन रद्द कर दिया है। अमान्य बोर्ड से 12वीं करने के कारण यह कार्रवाई की गई है। सचिन ने 12वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ एजूकेशन अजमेर-नई दिल्ली से की है। इसके कागजात एडमिशन के दौरान लगाए। विवि में यह बोर्ड मान्य नहीं है।
सहायक प्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, लॉ डिपार्टमेंट के समन्वयक डॉ. केके मित्तल को एडमिशन में अनियमितता बरतने के आरोप में पद से कार्यमुक्त कर दिया गया है। डॉ. मित्तल मेरठ कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट में शिक्षक हैं।
विवि भी हुआ एक्सपोज
सचिन के एडमिशन में विवि भी एक्सपोज हुआ है। विवि में ऐसे बोर्ड के छात्र को एडमिशन दे दिया गया, जो मान्य ही नहीं है। यह विवि की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सचिन के कागजात दो स्तर पर चेक किए गए। पहले एडमिशन के दौरान और दूसरे चुनाव लड़ने से पहले। दोनों स्तर पर यह गलती नहीं पकड़ी गई। छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद मामले ने तूल पकड़ा।
एक भी दिन नहीं बैठे कुर्सी पर
विवि के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि अध्यक्ष की विदाई बिना कुर्सी पर बैठे हो गई। विवि ने चुनाव के नतीजे घोषित करते ही शपथ ग्रहण करा दी थी। शिकायत के बाद अध्यक्ष को ऑफिस की चाभी नहीं दी गई। इस दौरान ऑफिस का ताला तोड़ने की शिकायत हुई थी।
उपाध्यक्ष को मिलेगा चार्ज
अब छात्रसंघ अध्यक्ष का चार्ज उपाध्यक्ष को दिए जाने की संभावना है। यह फैसला चुनाव अधिकारी को करना है। ऑर्डिनेंस में प्रावधान है कि चुनाव होने के दो महीने के अंदर अगर अध्यक्ष हटता है तो चार्ज उपाध्यक्ष को मिलेगा। इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। छात्रसंघ उपाध्यक्ष एबीवीपी के संजीत कुमार सिंह जीते हैं।
दबाव में हुई कार्रवाई : सचिन
एडमिशन रद्द होने पर सचिन चौधरी का कहना है दाखिले के दौरान तथ्य नहीं छिपाए। एडमिशन के बाद चुनाव लड़ा और जीता। विवि ने शपथ दिलाई। आरोप लगाया कि समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश अध्यक्ष अतुल प्रधान के दबाव में विवि ने कार्रवाई की है।