बंदी का वारंट बनवाने के लिए मुंसिफ कोर्ट पहुंचे दरोगा पर मजिस्ट्रेट के साथ अशालीन व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता लामबंद हो गए हैं। वकीलों ने डीएम और एसएसपी का घेराव कर दरोगा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दोनों पक्षों के बीच करीब तीन घंटे तक चली वार्ता बेनतीजा रही।
सरूरपुर थाने में तैनात दरोगा मंगलवार को नोएडा जेल में बंद एक बंदी का तलबी वारंट बनवाने मुंसिफ कोर्ट पहुंचा था। वारंट के मसले पर मजिस्ट्रेट ने दरोगा से शासकीय अधिवक्ता से जानकारी लेने की बात कही। इस पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। आरोप है कि दरोगा ने मजिस्ट्रेट के साथ अशालीन व्यवहार किया। बात बढ़ने पर मजिस्ट्रेट ने कोर्ट में तैनात पुलिसकर्मियों को दरोगा को कस्टडी में लेने के निर्देश दिए, लेकिन पुलिसकर्मी पीछे हट गए।
उधर, मामले की जानकारी मिलते ही बार अध्यक्ष लियाकत अली, पूर्व बार अध्यक्ष चौधरी वेदपाल सिंह, पूर्व बार अध्यक्ष कुलदीप त्यागी, पूर्व बार महामंत्री संजीव पंवार, मेहरबान अली, प्रशांत त्यागी, विश्वेष कौशिक, कमलराज, रामबीर राणा, प्रमोद शर्मा, नितिन चांदना, मोहम्मदीन, जुनेद अली, अरविंद, जगपाल, जयवीर सिंह, शोहित त्यागी कोर्ट पहुंच गए। नाराज अधिवक्ताओं ने तहसील दिवस में समस्या सुन रहे डीएम पंकज यादव और एसएसपी दिनेेशचंद दूबे का घेराव करते हुए दरोगा को निलंबित करने की मांग की।
दरोगा श्रीपाल सिंह ने डीएम और एसएसपी के समक्ष अपना पक्ष रखा। एसडीएम कार्यालय में करीब तीन घंटे मामला सुलझाने के लिए वार्ता चली। अधिवक्ताओं का कहना है कि दरोगा के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वार्ता बेनतीजा रहने पर अधिवक्ताओं ने एसडीएम कार्यालय के बाहर नारेबाजी की। कार्रवाई नहीं होने पर हड़ताल कर आंदोलन करने की चेतावनी दी।