आम बजट में सोने और हीरे के आभूषण पर एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगाने के विरोध में बुधवार को गोल्ड सिटी बंद रही। सर्राफा कारोबारियों ने कई बाजारों में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। इस बंदी से करीब 10 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। बृहस्पतिवार और शुक्रवार को भी सर्राफा बाजार बंद रहेंगे।
नील की गली में सर्राफा व्यापार संघ के महामंत्री दिनेश रस्तोगी के नेतृत्व में सर्राफा व्यापारी एकत्रित हुए, जिन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले को कोई भी सर्राफा व्यापारी मानने को तैयार नहीं है।
वहीं, शहर सर्राफा में सोना-चांदी व्यापार संघ के अध्यक्ष संत कुमार वर्मा के नेतृत्व में सर्राफा व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। कागजी बाजार में मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के मंत्री विजय आनंद के नेतृत्व में सर्राफा व्यापारियों ने बंद को सफल बनाते हुए इस फैसले का विरोध किया।
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन के काउंसिल मेंबर रविप्रकाश अग्रवाल और मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री सर्वेश सर्राफ ने कहा कि बंद में सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से सहयोग किया है।
ये बाजार रहे बंद
मेरठ में मुख्य रूप से शहर सर्राफा, सदर सर्राफा, नील की गली, कागजी बाजार, भगत सिंह मार्केट, आबूलेन, बेगमपुल, शारदा रोड, लिसाड़ी रोड, फूलबाग कॉलोनी, शास्त्रीनगर, कंकरखेड़ा, रोहटा रोड आदि क्षेत्रों में शोरूम फैले है, जो पूरी तरह बंद रहे।
यूं है एक्साइज का विरोध
सर्राफा कारोबारियों का तर्क है कि 80 के दशक में कस्टम और सेंट्रल एक्साइज से सर्राफा कारोबारियों का काफी उत्पीड़न किया गया था, जो फिर से शुरू हो जाएगा। एक्साइज ड्यूटी लगाने से जहां पेपर वर्क बढ़ जाएगा। वहीं, सीए आदि का खर्च भी बढ़ेगा। एक अन्य विभाग सर्राफा व्यापारियों से जुड़ जाएगा।
21 दिन रह चुकी हड़ताल
करीब दो साल पहले भी केंद्र सरकार ने सर्राफा कारोबार पर एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगा दी थी। इसके विरोध में देश भर में 21 दिन तक हड़ताल रही थी। सर्राफा कारोबारियों का आक्रोशित रुख देखकर केंद्र सरकार ने एक फीसदी एक्साइज ड्यूटी को वापस ले लिया था। इस बार भी सर्राफा कारोबारी आर-पार के लिए तैयार है।
ग्राहकों को दिक्कत
सर्राफा बाजार तीन दिन बंद होने से उन ग्राहकों के लिए दिक्कत हो गई है, जिन्हें शादी के लिए ज्वैलरी खरीदनी है या जिन्होंने पहले से ऑर्डर दे रखे हैं।