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तीन साल में भी नहीं शुरू हुई अल्ट्रासाउंड मशीन

Wed, 02 Mar 2016 01:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद जिले को मिलीं चार अल्ट्रासाउंड मशीनें शोपीस बनकर रह गई हैं। तीन साल में सिर्फ एक मशीन का संचालन शुरू हुआ है। इन मशीनों को संचालित करने का प्रशिक्षण देने के लिए चिकित्सकों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर एक बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अधिक शुल्क देकर निजी केंद्रों से सेवाएं लेनी पड़ रही हैं।
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कॉमनवेल्थ गेम्स के बाद 2013 में प्रदेश को कई अल्ट्रासाउंड मशीनें मिलीं थी। इनमें से चार मेरठ के हिस्से में आईं। तत्कालीन सीएमओ डॉ. अमीर सिंह ने इन्हें दौराला, सरधना, हस्तिनापुर और मवाना सीएचसी के लिए आवंटित किया था। इन मशीनों के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास कोई योग्य चिकित्सक नहीं था। इसके बाद विभाग ने रेडियोलॉजी में डिप्लोमा और डिग्री धारक चिकित्सक की खोज में ही करीब एक साल गुजार दिया।

मामले ने तूल पकड़ा तो उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी पर तैनात ही चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया। लगभग छह महीने तक प्रशिक्षण चला। इसके बाद अल्ट्रासाउंड मशीन का पंजीकरण कराने में ही छह से आठ महीने का वक्त लग गया, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड की जांच शुरू नहीं हो पाई है। वर्तमान में केवल दौराला सीएचसी में ही इस सेवा का संचालन शुरू है।
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मरीजों को खाने पड़ रहे हैं धक्के
शासन ने सीएचसी स्तर पर ही मरीजों को बेहतर सुविधा दिलाने के लिए अल्ट्रासाउंड की मशीनें लगाईं थी,लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। जांच कराने के लिए मरीजों को मेरठ शहर तक आना पड़ रहा है। इससे मरीजों का वक्त और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहे हैं।
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