केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) घोटाले में लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के एक दर्जन से ज्यादा छात्रों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
कानपुर और लखनऊ मेडिकल कॉलेज के बाद अब मेरठ मेडिकल कॉलेज के 10 छात्रों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया है। सीबीआई को अंदेशा है कि इन छात्रों ने व्यापम की तरफ से आयोजित परीक्षाओं के दौरान सॉल्वर (प्रश्न पत्र हल करने) की भूमिका निभाई है। जिसके चलते बड़ी संख्या में ऐसे छात्र परीक्षा में पास हो गए, जो योग्य नहीं थे।
सीबीआई ने जिन छात्रों को नोटिस जारी किया है, उनमें से कुछ छात्र एमबीबीएस करके जा चुके हैं। यानी डॉक्टर बन चुके हैं। जबकि कुछ अभी पढ़ाई कर रहे हैं। हाल ही में एमबीबीएस इंटर्न छात्र ऋषिकेश सिंह को नोटिस जारी कर भोपाल कार्यालय में पेशी के लिए बुलाया गया।
ऋषिकेश को 28 फरवरी को पेश होने की तारीख दी गई थी, लेकिन घर में शादी होने के कारण वह पेश नहीं हो पाया। जिसके चलते सीबीआई ने उसे मार्च के पहले सप्ताह तक पेश होने की छूट दी है। इसी तरह से करीब चार छात्रों और डॉक्टरों से पूछताछ अभी बाकी है जिसको लेकर अलग-अलग डेट दी गई हैं।
कॉलेज के माध्यम से नोटिस
सीबीआई के भोपाल कार्यालय में जितने भी छात्रों एवं डॉक्टरों को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है, उन सभी को नोटिस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के माध्यम से भेजे जा रहे हैं।
क्योंकि सीबीआई की तरफ से छात्र और डॉक्टर के नाम के साथ ही उनका एडमिशन वर्ष डालकर पत्र भेजा जा रहा है। सीबीआई के पत्र की प्रति के साथ कॉलेज प्रशासन नोटिस जारी कर पेशी के बारे में जानकारी देता है।
सॉल्वर रहे हैं अहम
सीबीआई को शक है कि व्यापम घोटाले में सबसे ज्यादा भूमिका उन लोगों की रही है, जो दलालों के माध्यम से प्रश्न पत्र हल करने के लिए गए। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि दलालों में ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट पास करने वाले ऐसे छात्रों को चिन्हित किया गया था, जो अच्छी रैंक लेकर एमबीबीएस में सेलेक्ट हुए।
क्योंकि उनके लिए कोई भी एग्जाम पास करना आसान था। इसलिए दलालों ने उन्हेें मोटी रकम देकर सॉल्वर बनने का ऑफर दिया, जिसमें से काफी ने उसे स्वीकारा भी। अब सीबीआई सभी से पूछताछ कर जानने की कोशिशों में लगी है कि आखिरकार उनकी भूमिका किस रूप में रही है। इसी कड़ी में मेरठ मेडिकल कॉलेज के छात्रों से पूछताछ की जा रही है।