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पौधों से प्यार, बगीचे में बसाया ‘संसार’

Sat, 27 Feb 2016 02:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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विकास की आंधी में पेड़ और पौधों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हरियाली पर हर तरह से चोट की जा रही है। लेकिन शहर में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें हरियाली से बहुत प्यार है।
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जिन्होंने बोनसाई और पौधों को अपनी खुशी बना लिया है। इन्होंने बगीचे में पौधों का संसार बसा दिया है, जहां धनिया से लेकर बादाम, जैतून और बोनसाई प्लांट्स की खासी किस्में हैं। इनकी देखभाल पर हर माह अच्छी खासी रकम खर्च की जाती है।

5 हजार गज में फैला बगीचा
फू लों और हरियाली को जिंदगी की आदत में शुमार कर चुकी हैं शिवाजी रोड निवासी शिखा नाथ। इन्हें हरियाली से इतना प्यार है कि उन्होंने अपना शौक 5 हजार गज के बगीचे में संवार दिया है। बकौल शिखा अपने फादर इन लॉ से मुझे यह शौक विरासत में मिला।
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जिन्होंने मुझे बागवानी के बारे में सिखाया-पढ़ाया और प्रेरित किया। रोजाना छह से सात घंटे का वक्त अपने गार्डन को देती हूं। इनके पास 2 हजार गमलों वाले बड़े-बड़े चार होम गार्डन हैं। एक ओर काले गुलाब सहित 30 प्रजाति के गुलाबों वाला रोज गार्डन है।

दूसरी ओर सब्जियाें, फलों, हर्बल प्लांट्स से सजा किचन गार्डन है। तीसरी ओर बोनसाई और फूलों के पौधे हैं। बादाम का पेड़, बरगद-पीपल कं बाइड बोनसाई, मोनस्ट्रीया, अडेनियम, 24 किस्मों का वॉगनवेलिया, रेयर साइकस, लाल पत्तागोभी, दालचीनी, तेजपत्ता, कपूर, लौंग, रुद्राक्ष, 17 हर्बल प्लांट, 7 मसालों के पौधे हैं।

बगीचे को कैन फर्नीचर, कैन झूला, स्वीमिंग पूल, वॉटर फॉल, लोटस पौंड, ग्रीनरी गेट, ग्रीन हाउस, वॉल आइपी और बर्ड्स इन बगीचों का हिस्सा हैं। 5 फुल टाइम माली हर वक्त बगीचों की देखरेख करते हैं। वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग पूरे बगीचे में होता है।
 
प्रकृ ति के उपहार को संवारती रीता
बॉटनी से मास्टर्स करने वाली रीता सेठ को कॉलेज लाइफ के दौरान ही पेड़-पौधों से लगाव हो गया। शिवाजी रोड निवासी रीता का 3 हजार गज में फैला बगीचा दोस्तों और रिश्तेदारों में हर समय चर्चा और आकर्षण का केंद्र रहता है।

बकौल रीता किसी भी चीज को सहेजने के लिए जिंदगी में बहुत मेहनत करनी पड़ती है, अपने बगीचे क ो मैंने उसी मेहनत से जिया है। कई बार टूटा और कई बार बनने वाले इस बगीचे में देसी और विदेशी बोनसाई, फूलों के दो हजार से अधिक पौधे हैं।

20 साल पुरानी बोनसाई, बॉटल ब्रश, किचन गार्डन, ओलिया फ्रे गरेंस प्लांट, अडेनियम, आर्किड, चीकू , कमल का तालाब, चीढ़, एयरप्लांट सहित 1500 से अधिक पौधे हैं, जिनकी देखभाल के लिए तीन फुलटाइम माली लगे हैं। वर्मी कंपोस्ट की मदद से पूरे बगीचे की देखभाल करते उसे नई रौनक देते हैं। खुद रीता रोजाना सात घंटे का वक्त अपने गार्डन की देखभाल में बिताती हैं।

पौधे नहीं ये तो मेरे बच्चे हैं
साकेत में रहने वाली मीनाक्षी गुप्ता बगीचे में लगे पौधों और फूलों को बच्चों की तरह प्यार करती हैं। मीनाक्षी गुप्ता कहती हैं फूलों से किसे प्यार नहीं होता। कोई इन्हें तोड़कर सजाता है, तो कु छ मेरी तरह होते हैं जो इन्हें सींचकर प्रकृति क ी खूबसूरती को निहारकर खुश होते हैं।

पौधों की डाल चटके तो मीनाक्षी को बहुत दुख होता है। दादी बन चुकी मीनाक्षी का रोजमर्रा की जिंदगी का अधिकांश वक्त अपने 2500 गज में फैले बगीचे में बीतता है। गार्डन को तीन भागों में बांटा है। बॉटनिकल और किचन गार्डन के अलावा, लैंडस्केपिंग और बोनसाई गार्डन है। इसमें 17 साल पुराने पौधे भी देखने को मिलेंगे।

आंवला, नींबू, बेल, सलाद के साथ वेरीगेटेड पाम, डहेलिया, रेचिस्कोम की 50 किस्म, कैल, चीकू, ट्यूलिप, स्टैगहॉल, कमरक जैसे रेयर प्लांट्स भी हैं। बगीचे को ब्लैक एंड व्हाइट ओरिजनल पत्थरों से बने स्कलप्चर्स से सजाया है। गरुड़ देव, काले पत्थर के गणपति, मदर चाइल्ड, जिराफ, धूप सेंकते बंदर, काला और सफेद हाथी के अलावा कु छ और स्कल्पचर्स बगीचे की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं।
 
बोनसाई का मास्टर एक डॉक्टर
डिफेंस कॉलोनी निवासी शहर के जाने-माने सर्जन डॉ. शंाति स्वरूप बोनसाई मास्टर हैं। घर पर बोनसाई और पौधों का सुंदर कलेक्शन होने के अलावा डॉ. शांति स्वरूप निचिन बोनसाई इंडो जपानी एसोसिएशन ऑफ मुंबई, इंडियन बोनसाई एसोसिएशन दिल्ली से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में भी बोनसाई पर लेख प्रकाशित हो चुके हैं।

डॉ. शांति स्वरूप बताते हैं कि पौधों से बचपन से प्यार था, 1991 में बोनसाई से जुड़ा। किताबों और कार्यशालाओं के जरिए इस कला में उतरता चला गया। पिछले 25 सालों से देश ही नहीं विदेशों में हुए फ्लावर शो में भाग लेता रहा हूं। इनके बगीचे में विविध प्रकार के नए पुराने 300 बोनसाई प्लांट्स हैं।

15 प्रकार के फाइकस, 40 किस्मों की वॉगनवेलिया है। 30 साल पुराना चीड़ का पेड़ और 28 साल पुराने वॉगनवेलिया कलेक्शन के हीरे हैं, जो इन्होंने कॉलेज लाइफ के दौरान लगाए थे। गूगल, बरसेरा, इलम, पाइन के भी पौधे हैं। डॉ. शांति स्वरूप अस्पताल में मरीजों को जितना टाइम देते हैं, घर पर उससे ज्यादा वक्त अपने पौधों के बीच बिताते हैं।

फूलों में बसती है ये जिंदगानी
साकेत निवासी पूनम गुप्ता ने घर को खास फूलों वाला लुक दिया है। पूनम कहती हैं, हर इंसान का जीवन में एक शौक एक चाहत होती है, मेरा शौक फूल, पेड़, पौधे हैं। इसलिए मैंने अपना बगीचा सजाया है। घर के बाहर सजा बगीचा हर किसी के आकर्षण का केंद्र है।

पूनम का अधिकांश वक्त अपने बगीचे में बीतता है। हालांकि माली बगीचे की देखभाल करते हैं, लेकिन पूनम की सोच है कि पर्सनल टच के बिना आप किसी भी चीज की तरक्की नहीं कर सकते। इसलिए मैं इन्हें पूरा वक्त देती हूं। पूनम ने बगीचे में फूलों के पौधों को विशेष स्थान दिया है, वहीं हर्बल प्लांट्स भी हैं।
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