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पाक जासूस के खिलाफ खामियों से भरी चार्जशीट

Fri, 26 Feb 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पाक जासूस मोहम्मद इजाज के खिलाफ बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में खामियों से भरी चार्जशीट दाखिल कर दी गई। करीब 510 पेजों की इस विस्तृत चार्जशीट में विवेचक ने केवल इजाज को ही मुख्य आरोपी माना है।
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जबकि चार अन्य आरोपी बनाए गए हैं, जो कोलकाता में पकड़े गए थे। न्यायालय ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इजाज का न्यायिक रिमांड बढ़ा दिया है।

यह है चार्जशीट
थाना सदर बाजार के विवेचक धर्मेंद्र कुमार की तरफ से दाखिल चार्जशीट में मुख्य आरोपी आईएसआई एजेंट इजाज पर आईपीसी की धाराएं 467, 468, 471, 380, 411, 14 विदेशी विषयक अधिनियम, 66 एफ आईटी एक्ट लगाते हुए दंडित करने की प्रार्थना न्यायालय से की गई है।
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चार्जशीट में 27 गवाहों को शामिल किया गया है।  विवेचक ने न्यायालय को अवगत कराया है कि मुख्य आरोपी इजाज के खिलाफ 3/4/9 शासकीय गोपनीय अधिनियम के तहत कार्यवाही के लिए न्यायालय में अलग से परिवाद दायर किया जाएगा।

मुख्य रूप से उल्लेख
चार्जशीट में मुख्य रूप से उल्लेख किया गया है कि इस मामले में विवेचना के दौरान सीबीआई लैब द्वारा इजाज से बरामद पैन कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन आदि की फोरेंसिक जांच की गई। जिसमें सेना से जुडे़ गोपनीय और प्रतिबंधित दस्तावेज इजाज द्वारा अपने लैपटॉप से भेजे जाना पाए गए।

जिसकी कापी हार्ड डिस्क से प्राप्त की गई है। हालांकि हार्ड डिस्क की जांच अभी होना शेष है। इजाज के कब्जे से फर्जी पहचान पत्र के अलावा बैंक ऑफ इंडिया का एटीएम कार्ड, मेट्रो का कार्ड, पहचान पत्र, वोटर कार्ड, हाथ से बने नक्शे बरामद हुए हैं।

चार्जशीट में इजाज के अलावा कोलकाता निवासी मोहम्मद इरशाद अंसारी पुत्र रफीक, मोहम्मद अशफाक पुत्र इरशाद, मोहम्मद जहांगीर पुत्र अब्दुल कादिर और इरफान को आरोपी बनाया गया है। इन चारों के खिलाफ विवेचना जारी होने की बात आईओ ने चार्जशीट में होनी बताई है।

चार्जशीट में कमजोर पक्ष (खामियां)
1. देश की सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण में एक ही बार में संपूर्ण चार्जशीट दाखिल कर दी गई। जबकि कानूनी रूप से आंशिक चार्जशीट दाखिल की जा सकती थी। जिससे विवेचना में ज्यादा समय मिल सकता था।

जबकि पूर्व में विवेचक द्वारा विवेचना से हाथ खड़े करते हुए असमर्थता भी जताई गई थी। गहराई से विवेचना की जाती तो ऐसे भी आरोपी बनते, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत हितों के लिए इजाज की मदद की।

2. मुख्य रूप से पुलिस वालों को ही गवाह बनाया गया। स्वतंत्र गवाहों के नाम देखने को नहीं मिले। जबकि कानूनी रूप से पुलिस वालों से ज्यादा स्वतंत्र गवाह मायने रखता है।

3. इजाज की पत्नी को इस प्रकरण की विवेचना शुरू होने से पहले ही क्लीन चिट दे दी गई। चार्जशीट में इजाज की पत्नी का कोई भी बयान नहीं लिया गया। न ही उसे इजाज के सामने लाकर सवाल-जवाब किए गए। पत्नी को इस चार्जशीट का भाग नहीं बनाया गया। जबकि उसकी गवाही अहम रहती।

4. खुद विवेचक ने बरामद हार्ड डिस्क की जांच होना शेष बताया। इसके बावजूद भी इजाज के खिलाफ अंतिम चार्जशीट लगा दी गई। संभव है कि हार्ड डिस्क में कुछ और भी पुख्ता सुबूत मिल सकते हैं।।

5. चार्जशीट में स्पष्ट उल्लेख है कि इजाज को सैन्य यूनिटों की विस्तृत जानकारी थी। जो उसने अपने आकाओं को भेजी। चार्जशीट में उन पहलुओं का जिक्र नहीं किया गया कि इजाज कैसे और कहां से सूचना एकत्र करता था।

यह जानकारियां उसे कौन-कौन देता था। इजाज के अलावा और कौन जिम्मेदार हैं। चार्जशीट में इस बिंदु पर गौर नहीं किया। सवाल है कि क्या बिना किसी स्थानीय मदद के इजाज को यह जानकारी मिल सकती थीं।

6. इजाज ने पाकिस्तान से आकर भारत में रहना शुरू किया। यहां शादी की। सरकारी दस्तावेज भी बनवा लिए। इसमें किन लोकल व्यक्तियों या सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत रही, इन सब बिंदुओं पर प्रकाश नहीं डाला गया।

7. इजाज के अलावा जो आरोपी बनाए गए, उनकी भूमिका का कोई जिक्र नहीं किया। केवल कोलकाता पुलिस के मेरठ आने के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया। इजाज को मुख्य टारगेट बनाते हुए ही इन चारों आरोपियों का का उल्लेख भर ही किया गया है।
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