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पाकिस्तान में मौत, किठौर से मृत्यु प्रमाणपत्र

Thu, 25 Feb 2016 01:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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शत्रु संपत्ति में फर्जीवाड़े का अनोखा केस जिला प्रशासन के सामने आया है। बंटवारे के समय पाकिस्तान गया एक व्यक्ति किठौर में 3720.93 हेक्टेयर जमीन छोड़ गया। शासनादेश में ऐसी संपत्ति शत्रु संपत्ति मानते हुए इस पर सरकार का कब्जा होता है, लेकिन इसमें कुछ जमीन पर निजी कब्जा हो गया। खास बात यह है कि इस जमीन का हमीद द्वारा मरने के तीस साल बाद वसीयत करने का दावा किया गया। और पाकिस्तान में मौत के बावजूद उसका किठौर नगर पंचायत से मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी हो गया। शिकायत मिलने पर अपर जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रकरण की जांच बैठा दी है।
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यह है पूरा मामला
किठौर के मौहल्ला मौसमखानी निवासी हमीद पुत्र फैजुल्ला 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए थे। जहां वर्ष 1950 में उनकी मृत्यु हो गयी थी। हमीद के खानदानी यहां किठौर में ही रह गए थे। इन्हीं में से एक अब्दुल समद पुत्र एतमाद ने शिकायत में बताया है कि हमीद के नाम पर किठौर में खसरा नंबर 883 में र.930 हेक्टेयर, खसरा नं. 2948 में 1940 हेक्टेयर और नंगला किठौर में खसरा नं. 117 में 1780 हेक्टेयर जमीन है। अब्दुल का दावा है कि उसने इस जमीन का भुगतान हमीद को दे दिया था, लेकिन रजिस्ट्री नहीं करा पाया था।

ये लगाए आरोप
अब्दुल का आरोप है कि किठौर नगर पंचायत से हमीद के नाम का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुआ। जिसमें उनकी मृत्यु 10 फरवरी 2004 को होना दिखाया गया है। यही नहीं, किठौर के ही पांच लोगों ने तत्कालीन चेयरमैन से साज करके  खसरा नंबर 883 की .930 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर लिया है। इस कब्जे का आधार ये लोग 25 जुलाई 1980 को हमीद द्वारा वसीयत करना बता रहे हैं। सर्किल रेट के अनुसार आबादी की इस जमीन की कीमत करीब तीन करोड़ बतायी जा रही है।
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सरकार में निहित होगी सारी जमीन
हमीद की जमीन इस समय शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आती है। क्योंकि शासनादेश के अनुसार जो लोग बंटवारे में पाकिस्तान चले गए थे और उनकी संपत्ति यहां रह गयी थी। वह शत्रु संपत्ति मानी गयी, और उसे सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। ऐसी जो भी संपत्ति मिलती है, उसे सरकार में निहित किया जाता है।

शिकायतकर्ता भी रहेगा खाली हाथ
नियमानुसार जब जमीन सरकार में निहित होगी तो हमीद के नाम पर जितनी भी जमीन है, उस पर सरकार का कब्जा होगा। ऐसे में कब्जा करने वाले ही नहीं शिकायतकर्ता को भी अब यह जमीन मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।
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