भाजपा ने बड़े ही नाटकीय ढंग से वीरेंद्र यादव को एमएलसी प्रत्याशी के तौर पर पेश कर दिया। वीरेंद्र यादव 2004 में सपा से इसी सीट पर ही एमएलसी का चुनाव लड़े थे, जिसमें उनकी हार हुई थी।
इस बार भी वे सपा से ही टिकट पाने की कोशिशों में लगे थे। सफलता न मिलने पर उन्होंने भाजपा का दामन थामा। वीरेंद्र यादव मूल रूप से मेरठ के गांव धनपुर के रहने वाले हैं और गंगानगर में रहते हैं।
रविवार तक दिल्ली निवासी गगन सोम की पैरवी भाजपा खेमे में हो रही थी। लेकिन अचानक सोमवार सुबह वीरेंद्र यादव का नाम सामने आ गया। आननफानन में वीरेंद्र को भाजपा जिला कार्यालय पहुंचने के निर्देश दिए गए।
यहां क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रद्युम्न कुमार और क्षेत्रीय महामंत्री जयकरण गुप्ता ने वीरेंद्र को पार्टी ज्वाइन कराते हुए प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसी जल्दी का परिणाम रहा कि एमएलसी नामांकन में दस प्रस्तावकों में से सात नगर निगम के पार्षद रहे। महानगर से तुरंत फोन करके इन्हें बुलाया गया।
वीरेंद्र यादव एमए बीएड हैं और मवाना तहसील के धनपुर में एक इंटर कालेज, पब्लिक स्कूल के साथ ही आईटीआई कालेज चलाते हैं। वीरेंद्र एक बार फिर सपा से चुनाव लड़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पार्टी में निष्क्रियता के चलते उन्हें दावेदारी नहीं दी गई।
300 वोट दिलाऊंगा : संगीत सोम
सरधना विधायक ठा. संगीत सोम ने दावा किया कि सपा ने बाहरी प्रत्याशी मैदान में उतारा है। जबकि भाजपा ने स्थानीय प्रत्याशी दिया है। मैं अपने प्रत्याशी को 300 वोट अपने दम पर दिलाऊंगा। गाजियाबाद, मेरठ, बागपत और हापुड़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस चुनाव को पूरी निष्ठा से लड़ाएंगे।
योगेश धामा पर लगी रही सबकी नजर
एमएलसी चुनाव में योगेश धामा को सबसे दमदार प्रत्याशी माना जा रहा था। रालोद नेता योगेश धामा की बागपत के साथ ही गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के बीच खासी पकड़ है। ऐसे में उन पर सबकी नजर लगी थी।
योगेश धामा बागपत के कद्दावर नेता माने जाते हैं। लगातार तीसरी बार उनके परिवार में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी रही है। लगातार दो बार वह जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गये, तो इस बार उनकी पत्नी निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। योगेश धामा के नाम से एमएलसी चुनाव के लिए पर्चा लिया गया था। ऐसे में सोमवार को उम्मीद थी कि धामा पर्चा दाखिल करेंगे।
उन पर सबसे ज्यादा नजर सपा की लगी थी। सपा के कई कार्यकर्ता कलक्ट्रेट में तीन बजे तक सिर्फ इसीलिए मौजूद रहे कि योगेश धामा पर्चा दाखिल करने तो नहीं आ रहे। जब तीन बजे का समय निकल गया तो सपाइयों ने राहत की सांस ली। यही स्थिति भाजपा की भी थी। भाजपा नेताओं का भी मानना है कि स्थानीय होने के नाते योगेश धामा सब पर भारी पड़ सकते थे।