चीन ने मेरठ से रिसर्च करने वालों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। मेरठ कॉलेज के शिक्षकों ने चिंडियन स्टडी सेंटर के साथ एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग) किया। जिसमें ज्वाइंट सेमिनार, रिसर्च प्रोजेक्ट और एक्सचेंज ऑफ स्कॉलर पर सहमति बनी है।
अगर कोई शोधार्थी चीन पर शोध करता है तो चीन आने पर उसकी हॉस्पिटेलिटी वहन की जाएगी। मिलकर सेमिनार और प्रोजेक्ट किए जाएंगे। अहम यह है चीन स्टडी सेंटर खोलने की बात आगे बढ़ी है। एंबेसी की एप्रूवल मिलने पर स्टडी सेंटर खोला जाएगा, जिसमें चीनी भाषा के डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जाएंगे।
मेरठ कॉलेज के डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट के शिक्षक डॉ. संजय कुमार के मुताबिक चिंडियन स्टडी सेंटर के निदेशक प्रो. जिया हैताओ ने एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फोर डेवलेपमेंट एंड सोशल साइंस के साथ एमओयू किया है।
चीन पर शोध करने वाला छात्र अगर चीन जाता है तो उसे हवाई जहाज का किराया खुद वहन करना होगा लेकिन वहां रहना, खाना और रिसर्च इनपुट में चीन की रकार मदद करेगी। चीन भारत में 24 स्टडी सेंटर खोलने जा रहा है, जिसमें से एक मेरठ कॉलेज में खोलने का प्रस्ताव है।
प्रो. जिया से चीनी भाषा में छह महीने का सर्टिफिकेट कोर्स और एक साल का डिप्लोमा कोर्स चलाने पर बात हुई है। दोनों कोर्स के लिए एंबेसी से एप्रूवल की जरूरत है। आश्वासन दिया है कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। गौरतलब है विभाग में चीन को लेकर कई पीएचडी और प्रोजेक्ट हो चुके हैं।
इसका लाभ स्टडी सेंटर बनाने में मिलेगा। गौरतलब है डिफेंस स्टडी डिपार्टमेंट का एमओयू थाईलैंड की थामासाट यूनिवर्सिटी से भी है।