मेरठ के सेंट्रल मार्केट का वह कांप्लेक्स, जिसे लेकर इस विवाद की शुरुआत हुई थी।
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शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के 661/6 आवासीय भवन में बनी मार्केट को ध्वस्तीकरण से बचाने की कोशिशें नाकाम हो रही हैं। सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा। दुकानदारों की ओर से दायर की गई रिव्यू याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज (डिसमिस) कर दिया। इससे पहले 28 अप्रैल को दुकानदारों की समय बढ़ाने की याचिका को भी खारिज किया गया था। अब 661/6 के ध्वस्तीकरण न होने की विधिक संभावनाएं क्षीण हो रही हैं।
राजीव गुप्ता एवं अन्य बनाम उप्र आवास एवं विकास और अन्य के डायरी नंबर 14243-2025 पर न्यायाधीश जेबी पारदीवाला एवं आर. माधवन ने सुनवाई करते हुए तत्काल खारिज कर दिया। इससे पहले राजेंद्र कुमार बड़जात्या बनाम उप्र आवास एवं विकास परिषद एवं अन्य के विविध प्रार्थना पत्र 493/2025 पर न्यायाधीश जेबी पारदीवाला एवं आर. माधवन ने 28 अप्रैल को खारिज कर दिया था। इसमें 17 दिसंबर 2024 को ध्वस्तीकरण के आदेशों का पालन न होने पर कड़ा ऐतराज जताया था।
आदेश में तीन महीने में 661/6 को खाली कराकर दो सप्ताह में ध्वस्त कराकर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन शर्मा ने बताया कि 28 अप्रैल को कोर्ट ने आदेश में कहा कि कांपलेक्स को खाली कराने के लिए दुकानदारों की ओर से समय बढ़ाने की याचिका को रद्द किया जाता है। इसी के साथ याची के दुकान खाली न करने पर अदालत की अवमानना का दोषी भी करार दिया है। इस मामले से संबंधित याचिकाओं को भी निस्तारित (डिस्पोज ऑफ) करने के आदेश दिए हैं।
इसी के तहत शुक्रवार को राजीव गुप्ता की याचिका खारिज कर दी गई। दूसरी ओर व्यापारी नेता किशोर वाधवा का कहना है कि 28 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राजेंद्र कुमार बड़जात्या की याचिका पर आदेश दिए थे। ऐसे में शुक्रवार को राजीव गुप्ता एवं अन्य की ओर से रिव्यू याचिका पर कोई पक्ष नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि अब सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है।
हाइकोर्ट के आदेश की अवमानना का वाद खारिज
सेंट्रल मार्केट में हाइकोर्ट के आदेशों का अनुपालन न होने पर अवमानना का वाद खारिज हो गया है। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अधीन है। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि 17 दिसंबर 2024 के आदेश का अनुपालन न हुआ तो वह जल्द सुप्रीम कोर्ट में भी अवमानना वाद दायर करेंगे। दूसरी ओर आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि मामले में मुख्यालय से विधिक राय ली जा रही है।