उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में समाजवादी आवासीय योजना में सस्ते फ्लैट में ठगी के मामले में 45 मुकदमों में सभी आरोपियों को क्लीन चिट देने पर सवाल खड़े हो गए हैं।
समाजवादी आवासीय योजना में सस्ते फ्लैट देने के नाम पर तीन साल पहले 2018 में ठगी के 45 मुकदमे दर्ज हुए थे। उन मुकदमों में आरवंश कलर सिटी के डायरेक्टर अनुराग गर्ग का नाम पहले निकाल दिया था। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सतवीर सिंह कर रहे थे। एक महीने पहले जांच को ट्रांसफर कर दिया। विवेचक राकेश पुंडीर की तरफ से आनन फानन में की गई कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है।
एसपी क्राइम रामअर्ज ने कहा कि अभी उनके पास लिखा पढ़ी में एफआर लगाने की रिपोर्ट नहीं आई है। केस डायरी आने के बाद नाम निकालने के तथ्य की जांच की जाएगी।
पुराने विवेचक के नाम से लगाई एफआर
विवेचक रहे सत्यवीर सिंह का कहना है कि एक महीने पहले उनके पास से विवेचना ट्रांसफर हो गई थी। अब जो एफआर लगी है वह भी सत्यवीर सिंह के नाम से लगी है, जबकि विवेचना राकेश पुंडीर कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ।