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सीसीएसयू में 'खेल' अभी जारी है, 2018 की कॉपियों में मिले 2015 के पेज

Thu, 18 Oct 2018 03:49 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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सीसीएसयू
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चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के दाग अभी धुंधले भी नहीं पड़े हैं कि फिर से बीएससी गृह विज्ञान की दो उत्तर पुस्तिकाओं के पेज बदल दिए गए हैं। ये पेज 2015 के हैं और मामला पकड़ में आने के बाद साफ हो गया कि एसटीएफ की छापामारी के बाद भी उत्तर पुस्तिकाओं में किया जाने वाला खेल बंद नहीं हुआ है। इस गोरखधंधे का खुलासा होने के बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराने के बजाए इसे यूएफएम (अनुचित साधन) कमेटी को सौंपकर पर्दा डालने की कोशिश में जुटा है। पूरे प्रकरण को लेकर यूनिवर्सिटी में चर्चा का माहौल गरम है। 

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पूरे मामले में रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव का कहना है कि यह मामला यूएफएम में क्यों रखा जा रहा है। इसकी जानकारी करा रहे हैं।

सेमेस्टर परीक्षा के बाद किया मूल्यांकन
सीसीएसयू से संबद्ध कॉलेजों में 2018 की सेमेस्टर परीक्षाओं के बाद उनका मूल्यांकन किया गया था। बीएससी गृह विज्ञान में द्वितीय सेमेस्टर की उत्तर पुस्तिकाओं की चेकिंग हुई तो छेड़छाड़ की बात सामने आई। बार कोड नंबर 8443276 एवं 8457387 की उत्तर पुस्तिकाओं में क्रमश: दो और छह अतिरिक्त पेज चिपके पाए गए। कापी के हर पेज पर लाइन में वर्ष अंकित रहता है। मूल पेजों पर 2018 अंकित था तो बदले गए पेजों पर 2015 लिखा हुआ मिला। वर्ष से ही पूरा मामला पकड़ में आ गया और मूल्यांकन प्रभारी को इसकी जानकारी दी गई। साफ है कि एसटीएफ की छापेमारी के बाद भी उत्तर पुस्तिकाओं में खेल बंद नहीं हुआ है। जानकारी में आने के बाद इस मामले में यूनिवर्सिटी की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई जानी चाहिए थी। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन इसे अनुचित साधन की श्रेणी-6 में रखते हुए यूएफएम कमेटी में ले जा रहा है।

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बचाने की कवायद

कमेटी के मेंबर इस मामले को अनुचित साधन का ही बनाकर छोड़ देना चाह रहे हैं, जो किसी भीतर के आदमी को बचाने की कवायद भी हो सकती है। लेकिन ऐसा हुआ तो उत्तर पुस्तिकाओं में खेल करने वाले गिरोह का काला धंधा बदस्तूर चलता रहेगा। यूनिवर्सिटी में बुधवार को इसको लेकर चर्चा का माहौल गरम रहा कि ऐसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई नहीं होगी तो काला धंधा करने वालों पर लगाम कैसे लगेगी? 

एसटीएफ ने किया था भंडाफोड़
एसटीएफ की टीम ने कैंपस के एक पूर्व छात्र कविराज को गिरफ्तार कर एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के खेल का भंडाफोड़ किया था। आरोपी छात्र विवि के कर्मचारियों के साथ मिलकर आंसर बुक सेंटर से एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाकर उनकी जगह दूसरी नई कॉपी लिखवाकर सेंटर में जमा कराने का ठेका लेता था। इसके बाद बार कोडिंग होने पर किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती थी। इसकी एवज में छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती थी।

एमबीबीएस पेपर लीक का खुलासा नहीं
एमबीबीएस में सेकेंड और थर्ड ईयर की पांच फरवरी से परीक्षाएं शुरू हुई थीं। 11 फरवरी को विवि के अधिकारियों के पास व्हाट्सएप पर कुछ सवाल भेजकर थर्ड ईयर के सेकेंड पार्ट सर्जरी का पेपर आउट होने की बात कही गई थी। मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी की जांच में एक सेल्फ सेंटर वाला कॉलेज शक के घेरे में आया था। इसके लिफाफे को देखकर, इसे खोलने के बाद दोबारा चिपकाए जाने की आशंका लग रही थी। यह मामला आज तक नहीं खुला है।

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