कमेटी के मेंबर इस मामले को अनुचित साधन का ही बनाकर छोड़ देना चाह रहे हैं, जो किसी भीतर के आदमी को बचाने की कवायद भी हो सकती है। लेकिन ऐसा हुआ तो उत्तर पुस्तिकाओं में खेल करने वाले गिरोह का काला धंधा बदस्तूर चलता रहेगा। यूनिवर्सिटी में बुधवार को इसको लेकर चर्चा का माहौल गरम रहा कि ऐसे मामलों में भी सख्त कार्रवाई नहीं होगी तो काला धंधा करने वालों पर लगाम कैसे लगेगी?
एसटीएफ ने किया था भंडाफोड़
एसटीएफ की टीम ने कैंपस के एक पूर्व छात्र कविराज को गिरफ्तार कर एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली के खेल का भंडाफोड़ किया था। आरोपी छात्र विवि के कर्मचारियों के साथ मिलकर आंसर बुक सेंटर से एमबीबीएस की उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाकर उनकी जगह दूसरी नई कॉपी लिखवाकर सेंटर में जमा कराने का ठेका लेता था। इसके बाद बार कोडिंग होने पर किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती थी। इसकी एवज में छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती थी।
एमबीबीएस पेपर लीक का खुलासा नहीं
एमबीबीएस में सेकेंड और थर्ड ईयर की पांच फरवरी से परीक्षाएं शुरू हुई थीं। 11 फरवरी को विवि के अधिकारियों के पास व्हाट्सएप पर कुछ सवाल भेजकर थर्ड ईयर के सेकेंड पार्ट सर्जरी का पेपर आउट होने की बात कही गई थी। मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी की जांच में एक सेल्फ सेंटर वाला कॉलेज शक के घेरे में आया था। इसके लिफाफे को देखकर, इसे खोलने के बाद दोबारा चिपकाए जाने की आशंका लग रही थी। यह मामला आज तक नहीं खुला है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/