सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण ध्वस्त होने के बाद मूल आवंटी वीर सिंह के बेटे दुष्यंत कुमार ने आवास विकास से कब्जा वापस दिलाने की मांग की थी। व्यापारियों ने दुष्यंत के दावे को सिरे से खारिज कर दिया था।
शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट के आवासीय भूखंड संख्या 661/6 का मामला एक बार फिर सुर्खियों में हैं। आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना की शिकायत पर आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि इस भूखंड का आवंटन वर्ष 2013 में निरस्त कर दिया गया था। लेकिन आवास विकास परिषद ने भूखंड पर कब्जा नहीं लिया था। इसके बाद मूल आवंटी के पुत्र दुष्यंत और दुकानदारों में कब्जे को लेकर विवाद बढ़ गया है।
विज्ञापन
हाल ही में मूल आवंटी वीर सिंह के बेटे दुष्यंत कुमार ने उप आवास आयुक्त से कब्जा दिलाने की मांग की थी। इस पर दुकानदार विरोध में उतर आए थे। उन्होंने तर्क दिया कि आवासीय भवन में बनी दुकानों को व्यावसायिक दरों पर खरीदा है।
व्यापारी नेता किशोर वाधवा, रजत गोयल, राजीव गुप्ता, रजत अरोड़ा, हरेंद्र, राकेश मदान, मनदीप सिंह, संदीप सिंह, अमरदीप सिंह, राजेंद्र बड़जात्या, संगीता जैन, शकुंतला देवी, डा. गोयल, पूनम व सतनाम आदि का कहना है कि दुष्यंत का दावा बेबुनियाद है। व्यापारियों ने बताया कि इस प्लॉट का आवंटन 1984 में वीर सिंह के नाम आवंटन हुआ था। आवंटी ने 1989 में 12 दुकानें बनाकर किराए पर दे दी थीं।
समय के साथ अपनी-अपनी दुकानें व्यापारियों ने 1994 से 2010 तक व्यावसायिक बैनामे कराकर वीर सिंह से खरीद लीं। आरोप है कि उन्हें धोखे में रखकर आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक स्टांप शुल्क लेकर रजिस्ट्री की गई।
व्यापारियों ने बताया कि इन दुकानों के पिछले भाग में कुछ भूमि रिक्त थी। इसका मुख्तारनामा वीर सिंह ने विनोद अरोड़ा को वर्ष 2012 में कर दिया। विनोद अरोड़ा ने इस भूमि पर निर्माण करके बैनामे के आधार पर दुकानें बेच दीं। वर्ष 1989 से 2025 तक सभी व्यापारी अपनी-अपनी दुकानों पर काबिज हैं। इसके लिए आवास एवं विकास कार्यालय में सभी दस्तावेज जमा भी किए हैं।
अब मामले में आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इस प्लॉट के आवंटन की मौजूदा स्थिति को लेकर शिकायत की। आवास एवं विकास परिषद की अधिशासी अभियंता अभिषेक राज ने शिकायत के जवाब में बताया कि 2013 में 661/6 भूखंड का आवंटन निरस्त किया जा चुका है। विभाग की ओर से कब्जा नहीं लिया गया। मामले में नोटिस भी भेजे गए। लोकेश खुराना ने बताया कि जवाब में कहा गया है कि 661/6 की रजिस्ट्री हो चुकी है। विक्रय विलेख निरस्तीकरण की प्रक्रिया उपनिबंधक कार्यालय से होनी है। इसके बाद मूल आवंटी का कब्जा स्वत: समाप्त हो जाएगा। विभाग द्वारा भौतिक कब्जा वापस नहीं लिया गया है।