बता दें कि नौ अगस्त को सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय-पबरसा रोड पर नाले में एक शव बरामद हुआ था। सिर और हाथ कटा था। पुलिस ने शव को मोर्चरी भेज दिया था। दौराला पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए फेसबुक पर बनाए ग्रुपों और थानों के 1626 ग्रुपों में फोटो भेजे थे। मंसूरपुर पुलिस ने फोटो देखे तो नोना गांव से लापता चल रहे मोंटी पुत्र सुरेश के परिवार वालों को जानकारी दी। मोंटी के भाई-बहन और परिवार वाले मोर्चरी पहुंचे तो उन्होंने शव की पहचान कर ली।
उन्होंने बताया था कि मोंटी की गर्दन पर टैटू बना हुआ था। उसके हाथ पर माता-पिता का नाम लिखा था। शायद इस वजह से ही हत्यारों ने उसकी गर्दन और हाथ काटकर शव फेंका ताकि उसकी पहचान न हो।
सिर कटी लाश मोंटी की नहीं, वह युवती के साथ बरामद
सिर कटी लाश मोंटी की नहीं है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने मोंटी को युवती के बरामद कर लिया है। चार भाइयों संजू, गोविंद, अरविंद और दो बहनों मनीषा और निशा में सबसे छोटा है। वो चंडीगढ़ में दिन में सैलून की दुकान पर काम करता है और रात को गार्ड की नौकरी करता था। भाइयों ने बताया कि रक्षाबंधन पर मोंटी 22 अगस्त को गांव आया था। 28 अगस्त की रात वो घर से गायब हो गया।
वहीं, 29 अगस्त की सुबह पांच बजे गांव की युवती के परिजनों ने बताया कि मोंटी उनकी बेटी को बाइक पर अगवा करके ले गया है। इसके बाद से परिजन उसकी तलाश कर रहे थे लेकिन उसके बारे में कहीं पता नहीं चला। उसका मोबाइल तब से ही बंद आ रहा था। भाइयों ने बताया कि वे अनुसूचित जाति समाज हैं, युवती भी उनके समाज से ही है।
मोंटी का शव समझ कर परिजनों अंतिम संस्कार से किया था इंकार
बताया गया कि परिजनों ने सिर कटी लाश को ही मोंटी मान लिया था। लेकिन वह किसी और की लाश है। अब पुलिस के लिए फिर से सिर कटी लाश की पहचान कराना चुनौती बन गया है।