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मेरठ मेट्रो की ड्राफ्ट डीपीआर में फंसे तीन पेंच

Thu, 12 May 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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रुड़की रोड पर मैट्रो का निरीक्षण करती टीम - फोटो : अमर उजाला
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 मेरठ में मेट्रो ट्रेन की ड्राफ्ट डीपीआर का सत्यापन करने के बाद लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन ने संशोधन के साथ अपने सुझाव पेश कर दिए हैं। इस संबंध में सभी विभागों की बैठक में सामने आया कि मेट्रो की राह में जहां धन और जमीन की कमी है तो सेना ने भी आपत्ति दर्ज करा दी है।
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12 स्टेशन ऐसे हैं, जहां न तो प्राइवेट और न ही सरकारी जमीन खाली है। पैसा बचाने के चक्कर में टीम ने मेट्रो के दो स्टेशन भी खत्म कर दिए हैं।बुधवार को लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) के एमडी कुमार केशव, सहायक रवि जैन के साथ राइट्स तथा स्थानीय अधिकारियों ने मेट्रो की ड्राफ्ट डीपीआर का सत्यापन किया।
टीम ने सुबह दस बजे से कॉरिडोर वन के परतापुर से पल्लवपुरम तथा रजबन बाजार से गोकुलपुर तक का भ्रमण कर फिजिबिलटी देखी। ड्राफ्ट डीपीआर में विभिन्न संशोधन किए गए। इस बाबत टीम ने अपनी पूरी रिपोर्ट संशोधन के बाद मध्याह्न 3:30 बजे कमिश्नरी सभागार में हुई बैठक में पेश की।
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बैठक में मंडलायुक्त आलोक सिन्हा, डीएम पंकज यादव, वीसी एमडीए राजेश कुमार, एडम कमांडेंट सुबोध गर्ग, सचिव अश्वनी कुमार शर्मा, नोडल अधिकारी विवेक भास्कर, चीफ इंजीनियर एससी मिश्रा, एसई शबीह हैदर, राइट्स अधिकारी पीयूष कंसल, तरुण जैन, निगम चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

दो स्टेशन कर दिए खत्म
टीम ने प्रजेंटेशन में बताया कि माधवपुरम और ब्रह्मपुरी स्टेशन बेहद नजदीक हैं। ऐसे में माधवपुरम स्टेशन खत्म कर दिया गया है। अब परतापुर से ही एलीवेटिड ट्रैक शुरू होगा जो बागपत रोड क्रॉसिंग से अंडर ग्राउंड होकर गांधी बाग तक ऐसे ही जाएगा। पहले संजय वन से अंडर ग्राउंड ट्रैक प्रस्तावित था।

काली नदी से पार नहीं जाएगी मेट्रो
इसी तरह गोकुलपुर स्टेशन भी खत्म कर दिया गया। टीम ने माना कि काली नदी के पार इतनी जनता नहीं रहती है। केवल डिपो के लिए वहां प्रोजेक्ट ले जाया गया। कहा कि नदी के इस तरफ डिपो तलाशो। अब दोनों कॉरिडोर में 30 स्टेशन रह गए हैं।

सेना ने जतायी आपत्ति
टीम ने संशोधन किया कि गांधी बाग से अब अंडर ग्राउंड की बजाय एलीवेटिड ट्रैक रहेगा। बैठक में मौजूद एडम कमांडेंट सुबोध गर्ग ने तत्काल इस पर आपत्ति दर्ज करा दी। कहा कि वे मंत्रालय को अंडरग्राउंड का प्रस्ताव भेजकर पास करा चुके हैं।
अब नया प्रस्ताव नहीं भेज सकते। दूसरा, सुरक्षा के कारण यहां से ऊपर ट्रेन गुजारना कतई भी तर्कसंगत नहीं है। इसके अलावा मिलिट्री हॉस्पिटल के सामने नाले की दायीं पटरी की बजाय बायीं पटरी का संशोधन किया गया, जिस पर एडम कमांडेंट ने कहा कि प्रस्ताव भेजो, देखेेंगे।

नहीं बढ़ा रेट ऑफ रिटर्न तो मंजूर नहीं होगा प्रस्ताव
लखनऊ में 12 हजार करोड़ रुपये खर्च बताया गया था। लेकिन बुधवार की बैठक में कहा गया कि रकम खर्च होगी 15 हजार करोड़। अहम बात यह है कि ऐसे प्रस्ताव को भारत सरकार तभी मंजूरी देती है जब उसका एफआईआरआर (फाइनेंशियल इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न) 8 प्रतिशत हो, लेकिन मेट्रो का एफआईआरआर अभी 3.25 प्रतिशत तय हो पाया है।
ऐसे में यदि खर्च कम कर आय के साधन नहीं बढ़ाए गए तो यह प्रोजेक्ट शासन में धड़ाम हो जाएगा। टीम खर्च कम करने की कोशिश में है। यही कारण रहा कि माधवपुरम स्टेशन को खत्म कर एलीवेटिड ट्रैक करने में लगभग सात सौ करोड़ की बचत होगी।
इसी तरह से गांधी बाग को एलीवेटिड का प्रस्ताव करने से तीन सौ करोड़ बचेंगे। गोकुलपुर तक ट्रैक जाएगा ही नहीं तो पांच सौ करोड़ बचेंगे। ट्रैक की लंबाई लगभग तीन किमी कम की गई है। टीम ने डेढ़ हजार करोड़ बचाने का जुगाड़ तो इसी दिन कर दिया।

12 स्टेशन ऐसे जहां नहीं है जमीन
पहले 14 स्टेशन ऐसे थे जहां पार्किंग के लिए जमीन नहीं है। दो निरस्त होने से अब ऐसे 12 स्टेशन रह गए हैं। स्टेशन तो ऊपर या नीचे बन जाएगा, पर यहां पार्किंग न होने से लोग स्टेशन में कैसे घुसेंगे और कैसे निकलेंगेे। वाहन कहां खड़े करेंगे, यह यक्ष प्रश्न बना है। सरकारी जमीन की बात करें तो रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए 65 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। 45 हेक्टेयर जमीन ही अब तक चिन्हिृत हो पाई है।

इन स्टेशनों पर पार्किंग को चाहिए जमीन
कॉरिडोर वन : परतापुर से मोदीपुरम
स्टेशन              जमीन की जरूरत  उपलब्ध   किसकी जमीन
परतापुर                10250        10250      प्राइवेट
डीएन पॉलीटेक्निक    660              660       प्राइवेट
रिठानी                 770               770       एमडीए
शताब्दीनगर            2910             2910      प्राइवेट
संजय वन              1440             1440      प्राइवेट
माधवपुरम             630               अब प्रस्ताव कैंसल          
ब्रह्मपुरी               1920             1920      रामलीला ग्राउंड
बागपत रोड क्रॉसिंग    1990             नहीं         नहीं
रेलवे स्टेशन चौराहा    2730             2730     प्राइवेट
भैसाली                 1730             1730    भैसाली बस अड्डा
बेगमपुल               1870              1800    कैंट बोर्ड
एमईएस कॉलोनी       770               नहीं         नहीं
सोफीपुर               430                नहीं         नहीं
डौरली                 630                630     प्राइवेट
गुरुकुल                1110               1110     प्राइवेट
पल्लवपुरम             1400              नहीं         नहीं
मोदीपुरम               9370              8600     प्राइवेट
नोट: क्षेत्रफल वर्ग मीटर में है।

कॉरिडोर-टू : श्रद्धापुरी फेज टू से
स्टेशन              जमीन की जरूरत  उपलब्ध   किसकी जमीन
श्रद्धापुरी फेज टू    5390             5390     एमडीए
कंकरखेड़ा              1000             नहीं         नहीं
मेरठ कैंट स्टेशन         630              630    रेलवे स्टेशन
मिलेट्री हॉस्पिटल      480               नहीं         नहीं
रजबन बाजार           1290            नहीं         नहीं
बेगमपुल               3950              नहीं         नहीं
बच्चा पार्क          3470              नहीं         नहीं
शाहपीर गेट          1510            नहीं         नहीं
हापुड़ अड्डा चौराहा    4200           नहीं         नहीं
गांधी आश्रम          2180           2180      सरकारी जमीन
मंगल पांडे नगर       1840           1840     नगर निगम की विवादित जमीन
तेजगढ़ी                2070            2070    प्राइवेट
मेडिकल कॉलेज       1070            नहीं         नहीं
जागृति विहार एक्सटेंशन  1660         नहीं         नहीं
गोकुलपुर                6050           अब प्रस्ताव कैंसल
नोट: क्षेत्रफल वर्ग मीटर में है।

27 को फाइनल होगी डीपीआर
कमिश्नर ने बैठक में कहा कि 27 मई को बैठक कर डीपीआर फाइनल कर दी जाए। एलएमआरसी की टीम तो बुधवार को ही चली गई, पर अगले एक सप्ताह अब स्थानीय स्तर पर कवायद होगी। एमडीए अधिकारी, राइट्स अधिकारी, नगर निगम तथा सैन्य अधिकारियों के सामने तथ्य पेश करेेंगे और निगम से जमीन का रिकार्ड भी देखा जाएगा।
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कुछ तथ्य
- 30 किमी से घटकर लगभग 27 किमी का बचा मेट्रो ट्रैक
- भैसाली बस अड्डा हटाना नहीं है डीपीआर का पार्ट, इस पर अलग से होगा काम
- सरकारी या निजी जमीन की खरीद की रकम भी बनेगी डीपीआर का हिस्सा
- अतुल माहेश्वरी सेतु के बराबर ही एलीवेटिड दौड़ेगी मेट्रो
- कॉरिडोर वन में परतापुर थाने से एलीवेटिड शुरू होगा ट्रैक, बागपत रोड क्रॉसिंग पर होगा अंडरग्राउंड और गांधी बाग पर फिर से पल्लवपुरम तक एलीवेटिड
- दूसरा कॉरिडोर श्रद्घापुरी से काली नदी तक ही पूरा एलीवेटिड
- एलीवेटिड ट्रैक बनाना पड़ता है सस्ता, अंडर ग्राउंड महंगा
 
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