मेरठ मेट्रो ट्रेन के प्रस्ताव पर प्रदेश सरकार सो गई है। मुख्य सचिव ने चार माह पूर्व इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी और कैबिनेट में इसका अनुमोदन होना था। लेकिन प्रदेश सरकार इसे कैबिनेट में रख ही नहीं रही है। चर्चा है कि जान-बूझकर मेरठ का प्रोजेक्ट लटकाया जा रहा है।
30 जून को मेरठ मेट्रो की डीपीआर को सूबे के मुख्य सचिव ने हरी झंडी दे दी थी। स्थानीय स्तर से प्रस्ताव मंजूर कर शासन को भेज दिया गया था। लक्ष्य तो यह था कि जुलाई माह तक ही इसे कैबिनेट से पास कर केंद्र सरकार के पास भेज दिया जाता, ताकि वहां से मंजूरी मिल जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
आपत्तियां भी निपटाई थीं
इस बाबत एमडीए अधिकारियों ने लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के अधिकारियों को पत्र लिखा है। दरअसल कई ऐसे बिंदु देखे गए थे, जहां समस्या है। मसलन 14 स्टेशन ऐसे हैं, जहां जगह की किल्लत है। लखनऊ से मेसेज मिला था कि डीपीआर पर चर्चा करते समय यह बिंदु उठ सकता है, तो इस बाबत यहां से जवाब भेजा गया है। पिक एंड ड्राप सिस्टम पर जोर रहने की बात कही गई। दूसरा स्थानीय निकायों से कितने धन का इंतजाम होगा, इस पर सवाल खड़ा हो सकता था, इसकी रिपोर्ट भी भेज दी गई।
अब सो गई सरकार
चार माह बीत गए, लेकिन इस प्रस्ताव को कैबिनेट में नहीं रखा गया है। जबकि कई बार कैबिनेट की बैठक हो चुकी हैं। स्थानीय अधिकारियों ने एलएमआरसी अधिकारियों को भी याद दिलाया, पर उनका कहना है कि यह सरकार का मामला है, वहीं से एक्शन होगा। मान जा रहा है कि सपा सरकार मेरठ को लेकर गंभीर नहीं है। स्थानीय नेताओं की कमजोर पैरवी भी कारण है।
यह बनाया था हिसाब-किताब
मुख्य सचिव को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट पर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये खर्च आएगा। जनवरी 2016 के मूल्यों के आधार पर 11 हजार 220 करोड़ रुपये लागत आयेगी तथा मार्च 2022 तक यह लागत बढ़कर करीब 14 हजार 928 करोड़ रुपये हो जाएगी। प्रोजेक्ट के निर्माण में भारत सरकार द्वारा 20 प्रतिशत, राज्य सरकार द्वारा 20 प्रतिशत, लोकल बॉडी द्वारा 2.39 प्रतिशत दिया जाएगा। वित्त संस्थाओं से 57.61 प्रतिशत ऋण लिया जाएगा।
65 लाख वर्ग मीटर जगह चाहिए
रेजीडेंशियल, इंस्टीट्यूशनल और कामर्शियल एक्टिविटी के लिए डीपीआर में 51.1 लाख वर्ग मीटर जगह प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा पार्किंग डेवलपमेंट के लिए 14 लाख वर्ग मीटर की आवश्यकता होगी।
यह है कॉरिडोर
राइट्स के महाप्रबंधक पीयूष कंसल ने बताया कि मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर की कुल लंबाई 20 किमी रहेगी, जोकि परतापुर से मोदीपुरम तक होगा। द्वितीय कॉरिडोर की लंबाई 15 किमी होगी, जोकि श्रद्धापुरी फेस-2 से जागृति विहार एक्सटेंशन तक होगा। कुल लंबाई 35 किमी रहेगी। प्रथम कॉरिडोर में 11.6 किमी एलिवेटेड, 7.2 किमी अंडरग्राउंड होगा। द्वितीय कॉरिडोर में 10.7 किमी एलिवेटेड और 3.5 किमी अंडरग्राउंड होगा। प्रथम कॉरिडोर में 16 स्टेशन होंगे, जिनमें 11 स्टेशन एलिवेटेड, 5 अंडरग्राउंड होंगे। द्वितीय कॉरिडोर में 13 स्टेशन होंगे, जिनमें 10 एलिवेटेड और 3 अंडरग्राउंड होंगे। प्रथम कॉरीडोर में मोदीपुरम में 10 हेक्टेयर और द्वितीय कॉरिडोर में गोकलपुर में 12.2 हेक्टेयर का डिपो होगा।
29 रहेंगे स्टेशन
प्रथम कॉरिडोर में 16 स्टेशन होंगे, जिनमें परतापुर, डीएन पॉलीटेक्निक, रिठानी, शताब्दीनगर, संजय वन, ब्रह्मपुरी, बागपत रोड क्रासिंग, रेलवे रोड चौराहा, भैसाली, बेगमपुल, एमईएस कालोनी, सोफीपुर, डोरली, गुरुकुल, पल्लवपुरम, मोदीपुरम हैं। द्वितीय कॉरिडोर में 13 स्टेशन होंगे, जिनमें श्रद्धापुरी फेस-2, कंकरखेड़ा, मेरठ कैंट, रजबन बाजार, बेगमपुल, बच्चा पार्क, शाहपीर गेट, हापुड़ अड्डा चौराहा, गांधी आश्रम, मंगलपांडे नगर, तेजगढ़ी, मेडिकल कालेज, जागृति विहार एक्सटेंशन हैं। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन की औसत दूरी प्रथम कॉरिडोर में 1.2 किमी और द्वितीय कॉरिडोर में 1.1 किमी होगी।
यह थी प्लानिंग
प्रदेश सरकार का अप्रूवल - जुलाई 2016 तक
भारत सरकार का प्रारंभिक अप्रूवल अक्तूबर 2016
अंतरिम बैठक - दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए कमेटी का गठन - दिसंबर 2016
सिविल वर्क के लिए निविदा - जनवरी 2017
भारत सरकार की फाइनल अप्रूवल - मार्च 2017
प्राथमिकता के आधार पर सिविल वर्क का चयन - मार्च 2017
काम पूरा- मार्च 2022